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*भगवान भैरवनाथ काैन है?* भैरवनाथ को भगवान शिव का एक रौद्र और उग्र स्वरूप माना जाता है, जिन्हें उनका मानस पुत्र भी कहा जाता है। संस्कृत भाषा में "भैरव" शब्द का अर्थ होता है - 'भय' का 'नाश' करने वाला और अपने भक्तों की 'रक्षा' करने वाला। उन्हें काल (समय), मृत्यु और धर्म का स्वामी एवं न्याय का अधिष्ठाता माना जाता है। भैरव की पूजा-आराधना विशेष रूप से काठमांडू घाटी (नेपाल) सहित सम्पूर्ण नेपाल और भारत के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित मंदिरों में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ की जाती है। भैरवनाथ का स्वरूप प्रायः काला और भयानक (उग्र) दर्शाया जाता है, जो संसार की बुराइयों और अज्ञानता को नष्ट करने का प्रतीक है। उन्हें हाथों में त्रिशूल, खड्ग (तलवार), डमरु, कपाल आदि अस्त्र-शस्त्र धारण किए हुए चित्रित किया जाता है। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उनके वाम (बाएँ) भाग में सदैव माता भैरवी (शक्ति का स्वरूप) निवास करती हैं, जो शिव और शक्ति की अविभाज्य एकता को दर्शाता है। भैरव की उपासना करने का महत्व यह माना जाता है, कि इससे साधक की सभी नकारात्मक शक्तियाँ, जीवन की बाधाएँ, अकारण भय और अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। उनकी विशेष पूजा चतुर्दशी तिथि (खासकर कृष्ण पक्ष की) और शनिवार के दिन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, क्योंकि इन दिनों को उनकी शक्तियों के प्रकट होने का समय माना जाता है। धार्मिक दृष्टिकोण से, भैरव धर्म, न्याय और काल के प्रतीक हैं। वे पापियों को दंड देते हैं और साधकों की रक्षा करते हैं। दार्शनिक दृष्टि से देखें तो वे वह शक्ति हैं जो मनुष्य के जीवन को अनुशासित करती है, उसे सत्य के मार्ग पर चलने और अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देती है। 🕉️❤️

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