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20.4.2026 जो लोग अपना जीवन सुख से जीना चाहते हैं, तो उनके लिए यह आवश्यक है, कि *"वे कुछ मात्रा में दूसरों की गलतियों को सहन करें। और आत्मनिरीक्षण करते हुए अपनी गलतियों को भी दूर करें, उन्हें उखाड़ फेंकें।"* यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार से पुरुषार्थ पूर्वक अपना जीवन जीए, तो वह सुखपूर्वक जी सकता है, और अपने जीवन में पर्याप्त उन्नति कर सकता है। *"और यदि कोई व्यक्ति विशेष योगाभ्यासी हो, तो उसके लिए तो यह अनिवार्य ही है। अन्यथा उसकी योगाभ्यास में वर्षों तक भी कोई प्रगति नहीं हो पाएगी।"* *"इसलिए चाहे कोई सामान्य व्यक्ति हो, चाहे विशेष योगाभ्यासी हो, सभी को ये दो काम अवश्य ही करने चाहिएं। दूसरों के दोषों को कुछ सीमा तक सहन करना, और अपने दोषों को उखाड़ फेंकना।"* *"और जब दूसरों के दोष बहुत अधिक बढ़ जाएं, तथा आपकी सहनशक्ति की सीमा समाप्त हो जाए, तब उनसे दूर हो जाना चाहिए। अर्थात उनके साथ व्यवहार कम कर देना चाहिए, अथवा संबंध तोड़ देना चाहिए।" "परंतु झगड़ा तो किसी भी स्थिति में नहीं करना चाहिए, अन्यथा आप शांतिपूर्वक नहीं जी सकेंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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