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SHREE SHARMA

314 days ago

एक समय की बात है — जब देवी लक्ष्मी अपने वैभव और संपत्ति पर बहुत गर्व करती थीं। वे जहाँ भी जातीं, वहाँ सुख-संपत्ति की वर्षा हो जाती। लेकिन एक दिन, वे भगवान विष्णु के साथ ऋषियों के आश्रम में पहुँचीं। वहाँ ऋषियों ने देखा कि लक्ष्मी जी तो धन देती हैं, पर साथ में विवेक और बुद्धि नहीं देतीं। तभी ऋषियों ने लक्ष्मी जी से कहा — “माता! धन तभी सार्थक है जब उसके साथ बुद्धि और विवेक हो। बिना बुद्धि के धन अहंकार और विनाश का कारण बनता है।” यह सुनकर लक्ष्मी जी को बहुत विचार आया। वे सीधा कैलाश पर्वत पहुँचीं और भगवान शिव से उपाय पूछा। भगवान शिव मुस्कराकर बोले — “माता लक्ष्मी, धन का संतुलन तभी रहेगा जब उसे गणेश के साथ जोड़ा जाएगा, क्योंकि गणेश ही बुद्धि, विवेक और शुभता के प्रतीक हैं।” उस दिन से लक्ष्मी जी ने निश्चय किया कि वे जहाँ भी जाएँगी, गणेश जी के साथ ही पूजी जाएँगी, ताकि लोगों को धन के साथ बुद्धि, विवेक और शुभ फल भी मिले। इसी कारण दीवाली और हर शुभ कार्य में लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा की जाती है — क्योंकि धन (लक्ष्मी) बिना बुद्धि (गणेश) के अधूरा है। 🙏 संदेश: धन से ज़्यादा ज़रूरी है उसका सही उपयोग, और वही सिखाते हैं गणेश जी। 💖🥰जय श्री लक्ष्मी गणेश जी🥰💖

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Comments (3)

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Oct 23, 2025

भाई दूज की आपको हार्दिक बधाई और अनेकानेक शुभकामनाएं भाई जी 🙏🌹☺️ आप सदैव स्वस्थ और खुशहाल रहें इसी शुभकामना के साथ शुभ संध्या वंदन 🙏🌹☺️

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 21, 2025

🙏🌹 Jai Maa Lakshmi 🙏 Jai Shree Ganesh 🙏🌹