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खजूर (Dates) की खेती और उसे तैयार करने की प्रक्रिया काफी धैर्य और बारीकी वाला काम है। पेड़ से लेकर बाजार तक पहुँचने का सफर कुछ इस तरह होता है: 1. परागण (Pollination) खजूर के पेड़ों में नर और मादा पेड़ अलग-अलग होते हैं। प्राकृतिक रूप से हवा के जरिए परागण कम होता है, इसलिए किसान हाथों से (Manual Pollination) नर फूलों के पाउडर को मादा फूलों पर छिड़कते हैं। यह प्रक्रिया खजूर की पैदावार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। 2. फल का विकास (Stages of Ripening) खजूर सीधे पककर तैयार नहीं होता, यह चार चरणों से गुजरता है: * कीमरी (Kimri): फल हरा और सख्त होता है। * खलाल (Khalal): फल पीला या लाल होने लगता है और थोड़ा मीठा हो जाता है। * रुतब (Rutab): फल नरम और भूरा होने लगता है (आधा पका हुआ)। * तमर (Tamar): यह पूरी तरह पका हुआ और सूखा हुआ रूप है, जिसे हम आमतौर पर खाते हैं। 3. कटाई (Harvesting) जब खजूर 'तमर' की स्थिति में पहुँच जाते हैं, तो उन्हें बड़े गुच्छों में पेड़ से काट लिया जाता है। कुछ किस्मों को थोड़ा पहले काटकर कृत्रिम रूप से (Artificial ripening) भी पकाया जाता है। 4. छंटाई और सफाई (Cleaning & Sorting) * सफाई: कटे हुए खजूरों को साफ पानी या हवा के प्रेशर से धोया जाता है ताकि धूल और मिट्टी निकल जाए। * छंटाई: खराब, फटे हुए या छोटे खजूरों को अलग कर दिया जाता है। 5. सुखाना (Drying) खजूर को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसमें नमी की मात्रा कम करना जरूरी है। * प्राकृतिक तरीका: खजूरों को धूप में सुखाया जाता है। * मशीनी तरीका: आधुनिक फैक्ट्रियों में बड़े ओवन या 'डिहाइड्रेटर' का उपयोग किया जाता है ताकि नमी 20% से कम हो जाए। 6. ग्रेडिंग और पैकेजिंग अंत में, खजूरों की उनकी क्वालिटी, साइज और चमक के आधार पर ग्रेडिंग की जाती है। कुछ प्रीमियम खजूरों पर प्राकृतिक तेल या सीरप लगाया जाता है ताकि वे आकर्षक दिखें, और फिर उन्हें पैक करके बाजार भेज दिया जाता है। एक रोचक तथ्य: अगर खजूर को सुखाकर उसका सारा पानी निकाल दिया जाए, तो वह 'छुहारा' बन जाता है, जिसे सालों तक स्टोर किया जा सकता है।

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