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*🕉️दुनिया के किसी भी मंदिर में शिव का मुख दक्षिण दिशा में नहीं होता, फिर उज्जैन महाकाल का ऐसा क्यों?🕉️* 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱 *🪦उज्जैन महाकाल मंदिर का रहस्य: उज्जैन के महाकालेश्वर, जिनके बारे में मान्यता है, कि वो काल, यानी समय संसार से परे हैं. उज्जैन में ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान भगवान शिव काल को नियंत्रित करते हैं, इसलिए महाकाल कहे जाते है.* *बीते दिनों महाकाल मंदिर में कुछ ऐसा हुआ, जिसने ज्योतिषाचार्यों और धर्माचार्यों को आशंकित कर दिया है. क्या उज्जैन के महाकाल किसी पूजा विधि से आहत हुए हैं? क्या मंदिर में हुई घटना किसी अनिष्ट की आहट है? इन आशंकाओं के पीछे है महाकाल का भांग श्रृंगार, जिसकी परंपरा उज्जैन में सदियों पुरानी है. लेकिन अब इसे लेकर नया विवाद छिड़ गया है. आखिर क्या है महाकाल का वो भांग श्रृंगार और इसमें हुई कौन सी चूक किसी अनहोनी की आहट दे रही है.* *भगवान शिव ही महाकाल हैं, जो समय के हर राग-रंग के भैरव हैं. भस्म जिनका श्रृंगार है और भोग में भांग की आदि परंपरा. महाकाल मंदिर में सदियों से चली आ रही इन पूजा परंपरा को लेकर कोई सवाल नहीं, ये बस चलती आ रही हैं. भस्म और भांग यहां शिव आराधना की अहम सामग्री है. मंदिर में हर सोमवार महाकाल को भांग का मुखौटा लगता है! पूरे शिवलिंग पर भांग का लेप लगाकर फिर संध्या आरती की जाती है.* *📿सीसीटीवी फुटेज में दर्ज हो गई घटना* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* बीते सोमवार की रात हुई ये विचित्र घटना की सीसीटीवी फुटेज अब सामने आई है. इसमें दिख रहा है, भांग का लेप कैसे ठीक आरती से पहले भरभरा कर गिरता है. भांग का मुखौटा गिरने से मंदिर प्रबंधन आशंकित है. सवाल उठ रहा है कि क्या महाकाल को भांग का मुखौटा स्वीकार नहीं है? आखिर भांग के प्रयोग पर ज्योतिषाचार्य और धर्माचार्य क्यों भड़के हैं? महर्षि पाणिनी वेद विद्या संस्थान के पूर्व कुलपति मोहन गुप्त तो भांग के इस्तेमाल पर ही सीधे सवाल खड़े कर रहे हैं. इनके मुताबिक भगवान शिव को भांग से श्रृंगार या भोग ही शास्त्र सम्मत नहीं है. तो फिर महाकालेश्वर जैसे ज्योतिर्लिंग मंदिर में ऐसा क्यो हो रहा है. *📿भांग में कैसे रसायन?* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* डॉ. मोहन गुप्त जैसे वेदज्ञाता और अमर त्रिवेदी जैसे ज्योतिषाचार्य सिर्फ धार्मिक आधार पर ही नहीं, भांग के इस्तेमाल से होने वाले शिवलिंग में रसायनिक परिवर्तन की भी बात कहते हैं. सबसे पहले समझिए भांग का रसायन कैसे बनता है. असल में भांग में कैनाबिनॉइड्स समूह के सैकड़ों रसायन होते हैं. इसमें नशे के लिए जिम्मेदार CBD और THC जैसे तत्व होते हैं. सीबीडी की वजह से भांग के कई चिकित्सीय लाभ होते हैं. जबकि टीएचसी की वजह से भांग नशीला होता है. इसमें कैरोटीन भी होता है, जो विटामिन एक का स्रोत है. भांग कुछ रसायन पत्थरों पर अपनी प्रतिक्रिया भी देते हैं. *📿भांग के भोग पर विवाद* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* भगवान शिव क्या गांजा, भांग और धतूरे जैसी नशीली वस्तुओं के भोग से प्रसन्न होते हैं? इस सवाल पर कुछ धर्माचार्य कहते हैं, वेदों में तो इसका कहीं कोई जिक्र नहीं है. जैसा कि हमारी रिपोर्ट के पहले चैप्टर में डॉ. मोहन गुप्त ने दावा किया. चौथे वेद अथर्ववेद में एक पौधे का जिक्र है, जो भांग जैसा है, लेकिन उसका नाम है विजया. अथर्ववेद में इसके औषधीय फायदे बताए गए हैं. तो फिर भगवान शिव के साथ भांग, धतूरे के भोग वाली मान्यता कैसे जुड़ी? मौजूदा परंपरा में नागा संन्यासी और अघोरपंथी भांग और चिलम का सेवन करते हैं. इसे भगवान शिव का भोग बताते हैं, तो क्या यही है भगवान शिव का सच्चा भोग? अगर ऐसा है, तो महाकाल में भांग के मुकुट गिरने से ज्योतिषाचार्य अनिष्ट की आहट के तौर पर क्यों देख रहे हैं...? भांग मुकुट गिरने के बाद ज्योतिषाचार्य अमर त्रिवेदी अपनी बात पर कायम है. यानी आने वाले समय में किसी अनहोनी की आशंका, क्योंकि ये संकेत है- महाकाल को भांग मुकुट का श्रृंगार पसंद नहीं आया. अमर त्रिवेदी इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण भी बता चुके हैं, कि बैसाल्ट की चट्टानों से बने ज्योतिर्लिंग के लिए भांग का लेप खतरनाक है. ऐसा ही दावा धार्मिक ग्रंथों के जानकार डॉ. मोहन गुप्त का भी है. लेकिन सवाल फिर से वही, भगवान शिव के साथ भांग की मान्यता जुड़ी कैसे. *📿भोलेनाथ को क्यों चढ़ाई जाती है भांग?* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* इसकी एक कथा समुद्र मंथन से निकले विष के घड़े से जुड़ी है. इसके मुताबिक भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकला पूरा विष पी तो गए, लेकिन इसे अपने गले में नीचे नहीं जाने दिया. इसके असर से उनका कंठ धीरे-धीरे नीला

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