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26.8.2026 ईमानदारी अनेक प्रकार की होती है। उनमें से एक प्रकार की ईमानदारी को शास्त्रीय भाषा में अस्तेय कहते हैं। *"स्तेय का अर्थ है चोरी करना। और अस्तेय का अर्थ है चोरी ना करना।"* *"चोरी करने का अर्थ मोटे तौर पर सब समझते हैं दूसरे कि वस्तु उठाकर घर ले जाना। यह तो चोरी है ही।" परंतु वेद आदि शास्त्रों में बताया है, कि "सूक्ष्म स्तर की चोरी वह भी है कि जो दूसरे व्यक्ति की वस्तु का, उससे पूछे बिना, आप प्रयोग कर लेते हैं।" "चाहे वह प्रयोग 2 या 5 मिनट के लिए ही क्यों न हो? आपने बिना पूछे दूसरे व्यक्ति की वस्तु का उपयोग किया, यह भी सूक्ष्म स्तर की चोरी है।"* *"जैसे कोई व्यक्ति 5 मिनट के लिए किसी की चप्पल लेकर बाथरूम में चला गया, और 5 मिनट बाद उसने चप्पल वापस लाकर रख दी। शास्त्र की दृष्टि में यह भी सूक्ष्म स्तर की चोरी है। ऐसा भी नहीं करना चाहिए।"* *"यदि आपको 5 मिनट के लिए किसी व्यक्ति की चप्पल का प्रयोग करना है, तो चप्पल के मालिक से पूछें। उससे पूछ कर चप्पल का प्रयोग कर लें। यह तो ठीक है।"* पर बिना पूछे प्रयोग करना, यह चोरी कहलाती है। *"शायद आपको यह बात समझ में नहीं आई होगी। अब इसको उलट कर देखें, तो समझ में आ जाएगी।"* *"यदि कोई व्यक्ति आपकी चप्पल बिना आपसे बिना पूछे 5 मिनट के लिए बाथरुम में ले जावे, और आप उसी समय आकर देखें , कि मेरी चप्पल कहां गई? और आपकी चप्पल न मिले, तो आप मन में क्या सोचेंगे, कि यहां कैसे चोर लोग रहते हैं। मेरी चप्पल ही चुरा ली।"* *"और जब 5 मिनट बाद वह व्यक्ति आपकी चप्पल वापस रखेगा। तब आप उसे चोर की नजर से ही तो देखेंगे। इसलिए बिना पूछे किसी की वस्तु का 5 मिनट के लिए प्रयोग करना भी चोरी है। और इसको छोड़ देना ही ईमानदारी है।"* *"अतः अपने व्यवहार को शुद्ध रखने के लिए बिना पूछे दूसरे की वस्तु का प्रयोग न करें। यह एक प्रकार की ईमानदारी है। इसी को शास्त्र में अस्तेय कहा गया है।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।"*

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