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11.6.2026 यूं तो संसार में प्रतिदिन लाखों करोड़ों घटनाएं घटती रहती हैं। पर उनमें से कुछ घटनाएं ही आपकी जानकारी में आ पाती हैं। *"जो भी घटना आपकी जानकारी में आती है, उस पर आप सकारात्मक विचार भी कर सकते हैं, और नकारात्मक भी।"* यदि आप सकारात्मक सोचते हैं, कि *"यह अच्छी घटना है। इससे यह लाभ है। और इससे अपना, समाज का और देश का भी भविष्य अच्छा बनेगा। तो आप उस घटना से प्रसन्न हो सकते हैं।"* *"यदि किसी घटना को देख सुन या जानकर आप उसके बारे में नकारात्मक सोचते हैं," कि "यह क्या हो रहा है? इससे तो देश का विनाश हो जाएगा, आदि आदि।"* यदि इस तरह का आपको विचार आए, तब यह देखें, कि *"क्या आप उस क्षेत्र में कोई सुधार कर सकते हैं? आपके सामर्थ्य के अंतर्गत है? यदि है, तो अवश्य ही सुधार करने का प्रयत्न करें। और यदि आपके सामर्थ्य में कुछ नहीं है, तब यदि आपकी इच्छा रुचि हो, तो उस क्षेत्र के अधिकारी व्यक्ति को सूचित कर दें। और यदि इतना भी सामर्थ्य न हो, तो फिर उस पर विचार करना बंद कर दें, अन्यथा आपकी मन: स्थिति बिगड़ जाएगी। और यदि आप लंबे समय तक ऐसा ही नकारात्मक चिंतन करते रहे, तो हो सकता है कि आप डिप्रेशन में भी चले जाएं। इसलिए इस समस्या से बचने के लिए उस घटना पर सोचना बंद कर दें।"* और कभी कोई व्यक्ति कोई क्रिया करता है, और आप उस क्रिया को देखकर जानकर बिना प्रमाण के ही कुछ अपनी ओर से कल्पनाएं करते हैं, कि यह व्यक्ति ऐसा भी करता होगा, ऐसा भी करता होगा, जो कि बहुत बुरी बात है। तो बिना प्रमाण के ऐसी कल्पनाएं भी न करें। *"क्योंकि जिस विषय में आपके पास कोई प्रमाण न हो, उस विषय में की जाने वाली कल्पनाएं भी अधिकतर झूठी होंगी। और वे झूठी कल्पनाएं आपको डिप्रेशन में ले जाएंगी।"* *"अत: अपने सोचने का ढंग ठीक करें। अच्छी घटनाओं पर प्रसन्न हों। बुरी घटनाओं की उपेक्षा करें। यदि आप उनमें कुछ सुधार कर सकते हों, तो अवश्य करें। अन्यथा उन बातों पर सोचना बंद कर दें। व्यर्थ में अपना तनाव न बढ़ाएं। तब आप ठीक ढंग से जी पाएंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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