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*अमृत कलश* *🕉️हरि नाम जप जप🍂* मनुष्य को स्वयं का ज्ञान प्राप्त करना चाहिये, कि मैं कौन हूँ, क्या हूँ, कैसा हूँ, जब मैं पैदा नही हुआ था तो कहाँ-किस रूप में था। जब मर जाऊँगा तो क्या रहूँगा भी या नही? होऊँगा तो कहाँ और किस रूप में? यही है "अध्यात्म". 'ब्रह्म जिज्ञासा" इन प्रश्नों से ही सिमटना आरम्भ होता है.. संसार से मन उचाट होना शुरू होता है... क्या करूँ...कैसे करूँ...कब .. बस! जल गई आत्मज्ञान की चिंगारी। भस्म होने वाला है अनन्त जन्मों के कर्मो का भंडार.. अब उदासीनता एक चिन्ह है। अरे भाई! "0" होना कोई मजाक है क्या? बोलो तो सही.. "समत्व योग" "दुख-सुख, लाभ-हानि, जय-पराजय, सर्दी-गर्मी, मान-अपमान। ध्यान लगाना चाहिये... मन के अनन्त विचारों को नदी समझ कर कूदने की कोई जरूरत नहीं.. हरि नाम और भजन में जरूर कूदना है। यही तो भगवान और जीवात्मा का स्वरूप है जय श्री राम ☘️📿🚩

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Comments (7)

Riya Riya  💖💖

Riya Riya 💖💖

Dec 3, 2025

Jai shree ram 🙏🙏 subha duphar vandan bhaiya ji 🙏🙏

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Dec 3, 2025

जय सिया राम जी 🙏 आप का दिन मंगलमय हो🌷 🙏🙏

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Dec 3, 2025

जय श्री राम जी 🙏

Sanjay  Ahlawat

Sanjay Ahlawat

Dec 3, 2025

जी हां जी आप बिल्कुल सही कह रहे हैं धन्यवाद आपका दिन मंगलमय हो

 Sanju  ❤️

Sanju ❤️

Dec 3, 2025

jai Shri Ram 🙏