
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
270 days ago
*अमृत कलश* *🕉️हरि नाम जप जप🍂* मनुष्य को स्वयं का ज्ञान प्राप्त करना चाहिये, कि मैं कौन हूँ, क्या हूँ, कैसा हूँ, जब मैं पैदा नही हुआ था तो कहाँ-किस रूप में था। जब मर जाऊँगा तो क्या रहूँगा भी या नही? होऊँगा तो कहाँ और किस रूप में? यही है "अध्यात्म". 'ब्रह्म जिज्ञासा" इन प्रश्नों से ही सिमटना आरम्भ होता है.. संसार से मन उचाट होना शुरू होता है... क्या करूँ...कैसे करूँ...कब .. बस! जल गई आत्मज्ञान की चिंगारी। भस्म होने वाला है अनन्त जन्मों के कर्मो का भंडार.. अब उदासीनता एक चिन्ह है। अरे भाई! "0" होना कोई मजाक है क्या? बोलो तो सही.. "समत्व योग" "दुख-सुख, लाभ-हानि, जय-पराजय, सर्दी-गर्मी, मान-अपमान। ध्यान लगाना चाहिये... मन के अनन्त विचारों को नदी समझ कर कूदने की कोई जरूरत नहीं.. हरि नाम और भजन में जरूर कूदना है। यही तो भगवान और जीवात्मा का स्वरूप है जय श्री राम ☘️📿🚩

Comments (7)

Riya Riya 💖💖
Dec 3, 2025
Jai shree ram 🙏🙏 subha duphar vandan bhaiya ji 🙏🙏

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Dec 3, 2025
जय सिया राम जी 🙏 आप का दिन मंगलमय हो🌷 🙏🙏

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Dec 3, 2025
जय श्री राम जी 🙏

Sanjay Ahlawat
Dec 3, 2025
जी हां जी आप बिल्कुल सही कह रहे हैं धन्यवाद आपका दिन मंगलमय हो

Sanju ❤️
Dec 3, 2025
right 👍

Sanju ❤️
Dec 3, 2025
jai Shri Ram 🙏
