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*✡️ॐ नमश्चण्डिकायै ✡️* *"पूरक बनें, बाधक नहीं"* 〰️〰️〰️⛳⛳〰️〰️〰️ *🌞हमारा जीवन सदैव एक दूसरे के लिए पूरक बनना चाहिए, बाधक नहीं। आज किसी के मार्ग में बाधक बनना, कल स्वयं के मार्ग में बाधा उत्पन्न करने की आधारशिला तैयार करना ही है। जब हम दूसरों के लिये जीना सीख लेते हैं तो दूसरे भी हमारे लिये जीने लग जाते हैं। वृक्ष भी फल तभी दे पाते हैं जब हम उनकी अच्छे से परवरिश करते हैं। जिस दिन हमारे मन में उनके लिए उपेक्षा का भाव आ जायेगा तो वो भी हमको अपनी शीतल छाया और मधुर फलों से वंचित कर देंगे।* *🌞हम दूसरों के लिए अच्छा सोचें, हम दूसरों के लिए जीना सीख लें तो हजारों-लाखों होंठ प्रतिदिन हमारे लिए प्रार्थना करने को आतुर रहेंगे। दूसरों की उपेक्षा करने की अपेक्षा जब तक हमारा जीवन परोपकार और परमार्थ में संलग्न रहेगा तब तक हमारी प्रतिष्ठा और उपयोगिता दोनों बनी रहेगी। परमार्थ ही प्रतिष्ठा को जन्म देता है। दूसरों के मार्ग में सहायक बनें, दूसरों के लिए प्रसन्नता दायक बनें और दूसरों के जीवन में पूरक बनें, यही तो मानवीयता की परिभाषा भी है-..!!!* *"दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं "* *🌻 जय माता दी 🌻🙏*

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