
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
196 days ago
*☘️ हर हर महादेव ☘️* आज महाशिवरात्रि पर्व, देवाधिदेव महादेव जिसके पूजित देवता हैं। सबसे पहले देवाधिदेव महादेव के श्री चरणों में दंडवत प्रणाम🙏 महाशिवरात्रि का पर्व जीव को शिव बनने की प्रेरणा देता है। यह सम्पूर्ण सृष्टि को शिवत्व का संदेश सुनाता है। शिव का अर्थ है - शुभ, मंगल। शंकर अर्थात्, कल्याण करने वाला। इस प्रकार आदर्शों के अनुरूप आचरण करने वाला ही शिवत्व को प्राप्त कर सकता है, इसमें संदेह नहीं।" जिन्होंने संसार के हित में कालकूट विष का पान कर लिया हो। इस समष्टि में उनके जैसा उदार व परमार्थी भला और कौन होगा? शिव के शरीर पर राख है, वो जटाजूटधारी हैं, गले में सर्प एवं नरमूंडों की माला है और भूत-प्रेत, पिशाच आदि भी इनके गण हैं। अर्थात्, संसार में जिनका सबने तिरस्कार कर दिया हो, भगवान शिव ने उन सबकॊ अपनाया और गले लगाया है। ये आशुतोष, औघड़दानी सभी के लिए सुलभ हैं, सुगम हैं और सरल हैं l देव हों या असुर सभी को सहज ही करुणा भाव से इच्छित वरदान प्रदान करते हैं। शिव के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरा हाथ में डमरू है। त्रिशूल संहार का प्रतीक है। सज्जनों की रक्षा और दुर्जनों का नाश करना इसका काम है। डमरू ज्ञान का उद्गाता है। सृष्टि के कितने ही रहस्यों का उद्घाटन भगवान ने डमरू बजाकर किया है। शास्त्रों में कहा गया है - "शिवोभूत्वा शिवं यजेत् ...’’ अर्थात्, शिव बनकर ही शिव की उपासना की जाती है, जिसमें कल्याणकारी भावना हो और दूसरों का कल्याण करने के लिए मन में ललक जगे, उसी का शिवरात्रि व्रत सार्थक है। समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत को जिन्होंने भी पीया वे देव, लेकिन विश्व कल्याण के निमित विषपान करने वाले महादेव। यही महादेव ही विश्व के संरक्षक व जगत पिता हो सकते हैं। जिनके मन में प्राणी मात्र व सम्पूर्ण सृष्टि की रक्षा की चिन्ता हो, लेकिन क्या कभी हमारे मन में पिता के गुणों की समीक्षा करते हुए उनको जीवन में धारण करने की उमंग जगी? हमने तो केवल पत्र-पुष्प ही चढ़ाया। जो हमारे पूज्य हैं, वही हमारे जीवन का आदर्श होना चाहिए, इस बारे में हमने सोचा ही कब? आज समय की पुकार यह है कि इस पर्व को मनाने का नया दृष्टिकोण देना होगा। शिवरात्रि का व्रत करते हुए जीवन में शिवत्व को धारण करने की प्रेरणा जगानी होगी। जीवन को सत्यम, शिवम, सुंदरम के रूप में ढालना होगा। जो सत्य नहीं, वह शिवम कैसे हो सकता है और जो शिवम नहीं, वह सुंदरम तो हो ही नहीं सकता। इसके अतिरिक्त जो कुछ भी है केवल प्रदर्शन मात्र है। संकीर्णता, ईर्ष्या-द्वेष, मिथ्या से भरे अंतःकरण में शिव का अवतरण कैसे हो? अतः हम केवल चित्र के नहीं चरित्र के उपासक बनें, क्योंकि जब चरित्र का आधार शुभ होगा तभी उसमें ज्ञान शोभायमान हो पायेगा और हम भगवान शिव के आशीर्वाद के अधिकारी बन पाएंगे। आइए हम सब विश्व कल्याण जैसे शुभ संकल्पों से भावित होकर देवाधिदेव महादेव की उपासना करें। उनसे प्रार्थना करें कि हम सभी का कल्याण करें। इस शुभ पावन अवसर पर आप सभी को आज महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं💐🙏 🕉️
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