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SHREE SHARMA

324 days ago

#तुलसी_माहात्म्य || तुलसी-वन्दना || पुष्पेषु तुलना यस्या नास्ति वेदेषु भाषितम् । पवित्ररूपा सर्वासु तुलसी सा च कीर्तिता ॥ शिरोधार्या च सर्वेषामीप्सिता विश्वपावनी । जीवन्मुक्तां मुक्तिदाञ्च भजे तां हरिभक्तिदाम् ॥ देवीभागवत ९| २५।४२-४३ ❝पुष्पोंमें किसीसे भी जिनकी तुलना नहीं है, जिनका महत्त्व वेदोंमें वर्णित है, जो सभी अवस्थाओंमें सदा पवित्र बनी रहती हैं, जो तुलसी नामसे प्रसिद्ध हैं, जो भगवान्‌के लिये शिरोधार्य हैं, सबकी अभीष्ट हैं तथा जो सम्पूर्ण जगत्‌को पवित्र करनेवाली हैं; उन जीवन्मुक्त, मुक्तिदायिनी तथा श्रीहरिकी भक्ति प्रदान करनेवाली भगवती तुलसीकी मैं उपासना करता हूँ।❞ || तुलसीके सर्वांग पावन || पत्रं पुष्पं फलं मूलं शाखात्वक्स्कन्धसंज्ञितम् । तुलसीसम्भवं सर्वं पावनं मृत्तिकादिकम् ॥ पद्मपुराण, उत्तर० २४|२ ❝तुलसीसे सम्बन्ध रखनेवाला जो कुछ भी पत्ता, फूल, फल, मूल, शाखा, छाल, तना और मिट्टी आदि है, वह सभी पावन है।❞ || तुलसी-सेवन सर्वविध कल्याणकारी || या दृष्टा निखिलाघसंघशमनी स्पृष्टा वपुष्पावनी रोगाणामभिवन्दिता निरसनी सिक्तान्तकत्रासिनी । प्रत्यासत्तिविधायिनी भगवतः कृष्णस्य संरोपिता न्यस्ता तच्चरणे विमुक्तिफलदा तस्यै तुलस्यै नमः ॥ पद्मपुराण, पाताल० ७६|६६ ❝जो दर्शन-पथमें आनेपर सारे पाप-समुदायका नाश कर देती है, स्पर्श किये जानेपर शरीरको पवित्र बनाती है, प्रणाम किये जानेपर रोगोंका निवारण करती है, जलसे सींचे जानेपर यमराजको भी भय पहुँचाती है, आरोपित किये जानेपर भगवान् श्रीकृष्णके समीप ले जाती है और भगवान्‌के चरणोंमें चढ़ाये जानेपर मोक्षरूपी फल प्रदान करती है, उस तुलसीदेवीको नमस्कार है।❞ || तुलसी-काष्ठसे मुक्ति || यद्येकं तुलसीकाष्ठं मध्ये काष्ठशतस्य हि । दाहकाले भवेन्मुक्तिः कोटिपापयुतस्य च ॥ पद्मपुराण, उत्तर० २४|६ ❝यदि दाहसंस्कारके समय अन्य लकड़ियोंके भीतर एक भी तुलसीका काष्ठ हो तो करोड़ों पापोंसे युक्त होनेपर भी मनुष्यकी मुक्ति हो जाती है।❞ || तीर्थरूप तुलसी-वन || तुलसीकाननं चैव गृहे यस्यावतिष्ठते । तद्गृहं तीर्थभूतं हि नायान्ति यमकिङ्कराः ॥ तुलसीमञ्जरीभिर्यः कुर्याद्धरिहरार्चनम् । न स गर्भगृहं याति मुक्तिभागी भवेन्नरः ॥ ❝जिसके घरमें तुलसी-वन होता है, वह घर तीर्थरूप हो जाता है, वहाँ यमदूत नहीं आते। जो मनुष्य तुलसीमंजरीसे भगवान् नारायणकी अथवा भगवान् शंकरकी पूजा करता है, वह फिर गर्भमें नहीं आता, वह मुक्तिका भागी हो जाता है।❞ || पर्यावरणशुद्धिमें समर्थ तुलसी || तुलसीगन्धमादाय यत्र गच्छति मारुतः ॥ दिशो दश च ताः पूता भूतग्रामश्चतुर्विधः । शब्दकल्पद्रुममें पद्मपुराण-उत्तरखण्डका वचन ❝तुलसीके संस्पर्शसे सम्पूर्ण वातावरण तथा पर्यावरण सर्वथा शुद्ध, पवित्र और विकार-मुक्त हो जाता है।❞ || यात्राकाल और तुलसी-दर्शन || यात्रासु पश्यति शुभां तुलसीं पवित्रां यो भक्तिभावसहितो मनुजो हि नूनम् । यात्राफलं सकलमेव हरिप्रसादात् तस्याशु सिद्ध्यति वचः सदृढं ममैतत् । पद्मपुराण-क्रियायोगखण्ड २४|३४ ❝जो मनुष्य भक्तिभावपूर्वक पवित्र एवं मंगलमय तुलसीतरुका दर्शन करके यात्रा आरम्भ करता है, वह श्रीहरिके अनुग्रहसे यात्राके पावन उद्देश्योंको शीघ्र ही प्राप्त कर लेता है— मेरा यह कथन सर्वथा सत्य है।❞ 🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿

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