
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
163 days ago
20.3.2026 संसार में कुछ लोगों के पास जीवन जीने के लिए आवश्यक साधन भी नहीं हैं। वे लोग दुखी और परेशान हैं। *"ऐसे लोग यदि ईमानदारी एवं बुद्धिमत्ता से पुरुषार्थ करें, तो वे उन आवश्यक साधनों को प्राप्त कर सकते हैं, जो जीवन जीने के लिए आवश्यक होते हैं। जैसे भोजन वस्त्र मकान आदि।"* *"कुछ लोगों के पास धन संपत्ति भोजन वस्त्र मकान आदि वस्तुएं तो हैं। उन्होंने ईश्वर की आज्ञा का पालन किया। ईमानदारी और बुद्धिमत्ता से पुरुषार्थ किया, इसलिए उन्हें धन संपत्ति आदि साधन तो मिले, परंतु शांति उनके पास भी नहीं है।"* और कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने ईमानदारी और बुद्धिमत्ता से पुरुषार्थ किया। और साथ ही साथ यह भी स्वीकार किया, कि *"हमें जो ये सब वस्तुएं प्राप्त हुई हैं, ये ईश्वर की कृपा से प्राप्त हुई हैं।" "ऐसे लोग सुबह-शाम प्रतिदिन बैठकर ईश्वर का ध्यान भी करते हैं। उसकी स्तुति प्रार्थना उपासना करते हैं, ईश्वर का धन्यवाद करते हैं। तब उन्हें ईश्वर से शांति भी मिल जाती है।"* *"आप भी यदि धन संपत्ति भोजन वस्त्र मकान आदि साधनों से संपन्न हों, और शांति की खोज कर रहे हों, तो आप भी ऐसा ही करें।" "प्रतिदिन नियमित रूप से सुबह शाम बैठकर ईश्वर की स्तुति प्रार्थना उपासना करें। ईश्वर का ध्यान करें और उससे शांति की प्रार्थना करें। तथा अपने व्यवहार को शुद्ध रखें। बुरे कामों से बचें। सभ्यता नम्रता सेवा परोपकार दान दया इत्यादि शुभ कर्मों का आचरण करें, तो आपको भी निश्चित रूप से मन की शांति प्राप्त होगी, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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