
SHREE SHARMA
255 days ago
।। भाव का भूखा हूँ मैं, और न दूजा काम... ।। जब भक्त के प्रेम के आगे विवश होकर ठाकुर जी ने खाया 'संत का जूठा' ❤️ भक्ति में वस्तु नहीं, केवल 'भाव' प्रधान होता है। एक संत का नियम था कि वे नित्य अपने ठाकुर जी को भोग लगाने के बाद ही स्वयं प्रसाद पाते थे। एक दिन गाँव में मंदिर में भंडारा था। संतों को पंगत में बैठने में देर हो रही थी। बाबा ने सोचा ठाकुर जी भूखे होंगे, इसलिए घर आकर जल्दी से मिश्री का भोग लगा दिया और भंडारे में चले गए। देर रात जब वे भंडारे से प्रसाद लेकर लौटे, तो घर के निकट पहुँचते ही मन में विचार आया- "मिश्री का भोग तो लगा ही आया हूँ, अब इसकी क्या आवश्यकता?" और इसी विचार में उन्होंने दोने से एक ग्रास उठाकर मुख में रख लिया। भुला न जाना... 🥺 निवाला मुँह में रखते ही उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ। "हे राम! यह मैंने क्या किया? घर तक आ ही गया था तो ठाकुर जी को भोग लगाकर ही पाता।" बाबा को घोर पश्चाताप हुआ। अब धर्मसंकट खड़ा हो गया— • ग्रास निगलें नहीं, क्योंकि ठाकुर जी को भोग नहीं लगाया। • और उगलें नहीं, क्योंकि वह भंडारे का पवित्र प्रसाद था, उसका अनादर होता। पश्चाताप की अग्नि 🔥 बाबा घर के बाहर ही बैठ गए। मुख में वह ग्रास दबाए, आँखों से अविरल आँसुओं की धार बहने लगी। वे आत्मग्लानि में डूबे रहे। ऐसे ही बैठे-बैठे दो दिन बीत गए। प्रभु का आगमन ✨ तीसरे दिन रात्रि के गहन अन्धकार में एक चमत्कार हुआ। एक छोटा सा, दिव्य बालक दौड़ता हुआ आया। उसने अपने नन्हे हाथों से बाबा का मुख खोला, वह 'जूठा' ग्रास निकाला और स्वयं खा लिया। बाबा कुछ समझ पाते, उससे पहले ही वह बालक अँधेरे में कहीं गुम हो गया। बाबा अवाक् रह गए। वे समझ गए कि यह कोई साधारण बालक नहीं था। वे दौड़कर अंदर गए और ठाकुर जी के चरणों में गिरकर रोने लगे। "वाह मेरे प्रभु! अपने इस तुच्छ दास के प्रेम और पश्चाताप का मान रखने के लिए, तुमने मेरे मुख का जूठा स्वयं खा लिया?" सत्य है, भक्त का भाव पूरा करने के लिए भगवान अपनी मर्यादा भी भूल जाते हैं। वे केवल प्रेम के भूखे हैं। 🙏 जय जय श्री राधे 🙏

Comments (3)

Rama Devi Sahu
Dec 23, 2025
Bahut hi Sundar Prasanga 👌👌 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏🌹🌹

R k jangid phulera Jaipur
Dec 18, 2025
जय श्री कृष्णा🙏

R k jangid phulera Jaipur
Dec 18, 2025
जय श्री कृष्णा सुप्रभात वंदन जी 🙏
