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SHREE SHARMA

375 days ago

. “परमात्मा की कृपा” सन्तों की एक सभा चल रही थी। किसी ने एक दिन एक घड़े में गंगाजल भरकर वहाँ रखवा दिया ताकि सन्त जनों को जब प्यास लगे तो गंगाजल पी सकें। सन्तों की उस सभा के बाहर एक व्यक्ति खड़ा था। उसने गंगाजल से भरे घड़े को देखा तो उसे तरह-तरह के विचार आने लगे। वह सोचने लगा–‘अहा ! यह घड़ा कितना भाग्यशाली है। एक तो इसमें किसी तालाब पोखर का नहीं बल्कि गंगाजल भरा गया और दूसरे यह अब सन्तों के काम आयेगा। सन्तों का स्पर्श मिलेगा, उनकी सेवा का अवसर मिलेगा। ऐसी किस्मत किसी-किसी की ही होती है।’ घड़े ने उसके मन के भाव पढ़ लिए और घड़ा बोल पड़ा–‘बन्धु मैं तो मिट्टी के रूप में शून्य पड़ा सिर्फ मिट्टी का ढेर था। किसी काम का नहीं था। कभी ऐसा नहीं लगता था कि भगवान् ने हमारे साथ न्याय किया है। फिर एक दिन एक कुम्हार आया, उसने फावड़ा मार-मारकर हमको खोदा और मुझे बोरी में भर कर गधे पर लादकर अपने घर ले गया। वहाँ ले जाकर हमको उसने रौंदा, फिर पानी डालकर गूंथा, चाक पर चढ़ाकर तेजी से घुमाया, फिर गला काटा, फिर थापी मार-मारकर बराबर किया। बात यहीं नहीं रूकी, उसके बाद आँवे के आग में झोंक दिया जलने को। इतने कष्ट सहकर बाहर निकला तो गधे पर लादकर उसने मुझे बाजार में बेचने के लिए लाया गया। वहाँ भी लोग मुझे ठोक-ठोककर देख रहे थे कि ठीक है कि नहीं ? ठोकने-पीटने के बाद मेरी कीमत लगायी भी तो क्या, बस 20 से 30 रुपये। मैं तो पल-पल यही सोचता रहा कि हे ईश्वर सारे अन्याय मेरे ही साथ करना था। रोज एक नया कष्ट एक नई पीड़ा देते हो। मेरे साथ बस अन्याय ही अन्याय होना लिखा है। लेकिन ईश्वर की योजना कुछ और ही थी, किसी सज्जन ने मुझे खरीद लिया और जब मुझमें गंगाजल भरकर सन्तों की सभा में भेज दिया तब मुझे आभास हुआ कि कुम्हार का वह फावड़ा चलाना भी प्रभु ही कृपा थी। उसका मुझे वह गूंथना भी प्रभु की कृपा थी। मुझे आग में जलाना भी प्रभु की मर्जी थी और बाजार में लोगों के द्वारा ठोके जाना भी भी प्रभु ही इच्छा थी। अब मालूम पड़ा कि मुझ पर सब परमात्मा की कृपा ही थी।’ बुरी परिस्थितियाँ हमें इतनी विचलित कर देती हैं कि हम परमात्मा के अस्तित्व पर भी प्रश्न उठाने लगते हैं और खुद को कोसने लगते हैं, क्यों हम सबमें शक्ति नहीं होती उनकी लीला समझने की। कई बार हमारे साथ भी ऐसा ही होता है हम खुद को कोसने के साथ परमात्मा पर अंगुली उठा कर कहते हैं कि उसने मेरे साथ ही ऐसा क्यों किया, क्या मैं इतना बुरा हूँ ? भगवान ने सारे दुःख दर्द मुझे ही क्यों दिए। लेकिन सच तो ये है कि भगवान ने उन तमाम पत्थरों की भीड़ में से तराशने के लिए एक आपको चुना है। अब तराशने में तो थोड़ी तकलीफ तो झेलनी ही पड़ती है। ० ० ० ॥जय जय श्री राधे॥ ********************************************

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Comments (9)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Aug 22, 2025

Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Bahut hi Sundar Prerana Dayak Kahani 👌👌🙏

Balraj Sethi Balraj Sethi

Balraj Sethi Balraj Sethi

Aug 19, 2025

Jai Shree Radhe Krishna ji.ki 🙏🏻🍁

Pannalal Chouhan

Pannalal Chouhan

Aug 19, 2025

जय श्री राधे कृष्णा जी राधे राधे

Pannalal Chouhan

Pannalal Chouhan

Aug 19, 2025

जय श्री गणेश गजानंद जी

neeraj

neeraj

Aug 19, 2025

जय जय श्री राधे