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31.7.2026 *"लोग कभी-कभी एक दूसरे के घर जाते हैं। कभी काम हो तब जाते हैं, और कभी बिना काम के भी चले जाते हैं। या किसी कार्यक्रम फंक्शन आदि में जाते हैं। तब कभी निमंत्रण मिलने पर जाते हैं, और कभी बिना निमंत्रण के भी चले जाते हैं। ऐसी स्थिति प्रायः मित्रों और रिश्तेदारों के साथ बनती रहती है।"* तो जब आपको किसी मित्र या रिश्तेदार से काम हो, या उसने आपको अपने कार्यक्रम में आने का निमंत्रण दिया हो, तभी उसके घर जाएं। *"बिना काम के बार-बार किसी के घर जाना अच्छा नहीं है। क्योंकि ऐसी स्थिति में आपका मूल्य कम हो जाएगा। वे लोग आपको फालतू आदमी समझेंगे, और धीरे-धीरे आपकी उपेक्षा आरंभ कर देंगे। तब आपको अपमान महसूस होगा।"* *"जहां कहीं आपके जाने से दूसरे लोग आपसे प्रसन्न होते हों, और यदि आप वहां न जाएं, तो वे लोग आपकी कमी अनुभव करते हों, ऐसे स्थान पर और ऐसे अवसर पर वहां जाना उचित है। तब दूसरों को भी आपकी उपस्थिति से आनन्द मिलेगा, और आपको भी ठीक से सम्मान मिलेगा।"* *"अतः व्यवहार में इन बातों का ध्यान रखें, और सबके साथ सावधानी पूर्वक व्यवहार करें। तभी आपको भी सुख मिलेगा।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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