
SHREE SHARMA
270 days ago
🌸 ब्रह्म जिसके इशारे पर नाचता है, उसे वृंदावन कहते हैं 🌸 एक बार सूर्यग्रहण के पावन अवसर पर कुरुक्षेत्र में ब्रजवासियों और द्वारिकावासियों का अद्भुत मिलन हुआ। जब रुक्मिणी जी और सत्यभामा आदि रानियों को पता चला कि ब्रजमंडल से श्री राधारानी जी भी पधारी हैं, तो उनके मन में दर्शन की तीव्र उत्कंठा जाग उठी। वे सदैव सोचती थीं कि द्वारिकाधीश नन्दलाल हर पल "राधे-राधे" क्यों रटते रहते हैं? आखिर कौन हैं वे? भगवान श्री कृष्ण की अनुमति लेकर रानियां राधारानी के शिविर की ओर बढ़ीं। ✨ **अद्भुत सौंदर्य का दर्शन** द्वार पर उन्हें एक अत्यंत तेजस्वी युवती मिली। उसका रूप इतना दिव्य था कि रानियां पल भर के लिए ठिठक गईं। उन्होंने पूछा, "क्या आप ही राधा हैं?" उसने विनम्रता से सिर झुकाकर कहा, "जी नहीं, मैं तो उनकी सेविका 'इन्दुलेखा' हूँ। स्वामिनी तो सात द्वारों के भीतर विराजमान हैं।" रानियां चकित रह गईं! जिसकी दासी इतनी रूपवान है, उसकी स्वामिनी कैसी होंगी? वे आगे बढ़ीं तो उन्हें ललिता, विशाखा, चम्पकलता जैसी अष्टसखियां मिलीं, जो एक से बढ़कर एक थीं। ✨ **श्री जी का साक्षात्कार** सातों द्वार पार करने के बाद, उन्होंने देखा कि श्री राधारानी एक दिव्य आसान पर घूँघट किए बैठी हैं। रुक्मिणी जी ने उनके चरणों में प्रणाम किया। जैसे ही श्री जी ने अपना घूँघट उठाया, उनके मुखमंडल से इतना तीव्र प्रकाश पुंज निकला कि रानियों की आँखें चकाचौंध हो गईं। ✨ **प्रेम की पराकाष्ठा** तभी रुक्मिणी जी की दृष्टि श्री राधा रानी के चरणों पर पड़ी। वहां फफोलों के घाव थे। व्याकुल होकर उन्होंने इसका कारण पूछा। श्री राधारानी ने सहज भाव से कहा— "बहन! कल रात्रि आपने प्रभु को जो दूध दिया था, वह अधिक गर्म था। प्रभु के हृदय में तो मेरे चरण विराजते हैं, उस गर्म दूध से उनके हृदय में जलन हुई, और उसी ताप से मेरे पैरों में ये छाले पड़ गए।" यह सुनकर रानियों का अभिमान क्षण भर में चूर हो गया। वे समझ गईं कि प्रेम की किस अवस्था का नाम 'राधा' है। 🌿 **वृंदावन का रहस्य** संसार में हम अतिथियों से बाहरी कक्ष में मिलते हैं, मित्रों से घर के भीतर और आत्मीय जनों से रसोई तक। लेकिन हमारे शयन कक्ष (निज कक्ष) में केवल हमारा अधिकार होता है। इसी प्रकार, यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड ईश्वर का है, किन्तु **वृंदावन श्री राधारानी का 'निज-महल' (अंतःपुर) है।** यहाँ प्रवेश केवल उनकी कृपा से मिलता है। जिसके संकेत पर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड नाचता है, वह 'ब्रह्म' है। और वह ब्रह्म (श्री कृष्ण) जिसके इशारे पर नाचते हैं, उसे **"वृंदावन"** कहते हैं। 🙌 **प्रेम से बोलो - राधे-राधे!** 🙌

Comments (7)

Rama Devi Sahu
Dec 3, 2025
Bahut hi Sundar Pauranik Katha....👌👌🙏

Rama Devi Sahu
Dec 3, 2025
Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Subha Ratri Jii 🌹🌹

Riya Riya 💖💖
Dec 3, 2025
🙏🌹Jai shree krishna 🙏🌹 Shubh Ratri Vandan Bhaiya Ji 🙏

