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19.6.2026 जब आप के पास कोई मित्र संबंधी रिश्तेदार, कोई माता-पिता भाई बहन आदि नहीं होते, तो ऐसी स्थिति में आप अकेलापन अनुभव करते हैं, दुखी होते हैं। जब ऐसी स्थिति हो, तो अकेलेपन के दुख से छूटने के लिए आप कुछ अच्छी आदतें बनाएं। *"अर्थात जब आप बिल्कुल अकेले हों, कोई सांसारिक मनुष्य आपके साथ न हों, तो उस समय का सदुपयोग आप इस प्रकार से कर सकते हैं।"* उस समय आप ईश्वर का ध्यान करें। वेद आदि सत्य शास्त्रों का स्वाध्याय करें। आत्म निरीक्षण करें, और देखें कि *"आपके जीवन में कहां क्या-क्या दोष और कमियां हैं? उन्हें दूर करने का संकल्प लें। फिर पूरा पुरुषार्थ करें, कि वे दोष और कमियां आपके जीवन से निकल जाएं।" "क्योंकि जब तक वे दोष और कमियां आपके जीवन में रहेंगी, तब तक वे आपको भी दुख देंगी और दूसरों को भी। उससे आपके पाप कर्म जमा होते जाएंगे, और भविष्य में बहुत भारी दंड भोगना पड़ेगा।"* उस समय सेवा परोपकार दान दया यज्ञ ध्यान आदि उत्तम गुणों को धारण करने का संकल्प लें, और पूरा पुरुषार्थ करें। *"इन उत्तम गुणों को धारण करने से आपको भी सुख मिलेगा और दूसरों को भी। उससे आपको बहुत सा पुण्य प्राप्त होगा। इस प्रकार से आपका जीवन सुखमय एवं सफल हो जाएगा।"* *"इसलिए अकेलापन तो बहुत अच्छा अवसर है। उसमें दुखी न हों, बल्कि उस अच्छे अवसर लाभ उठाएं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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