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15.7.2026 जीवन में सुख भी आता है और दुख भी। *"जैसे नदी के दो किनारों के बीच में नदी का पानी चलता है। ऐसे ही जीवन भी सुख-दुख रूपी दो किनारों के बीच में चलता है। इसलिए यह तो स्वाभाविक है, कि जीवन में सुख-दुख आते रहेंगे।"* परंतु महत्वपूर्ण बात यह है, कि *"जब भी आप के जीवन में दुख आए, तो उसका कारण अवश्य ढूंढें, कि हमारे जीवन में यह दुख क्यों आया? हमने कहां पर गलती की? यदि आप उस कारण को ढूंढ कर, उससे कुछ शिक्षा प्राप्त करें, संकल्प करें, कि अब हम उस गलती को भविष्य में नहीं दोहराएंगे, तो आप अगली बार वैसा दुख भी नहीं भोगेंगे।"* और जो वर्तमान में दुख आया है, उसको भोगने से आप मजबूत भी हो जाएंगे। *"फिर किन्हीं अन्य कारणों से यदि आप के जीवन में कुछ दुख आएंगे भी, तो इस मजबूती के कारण आपकी सहनशक्ति बढ़ेगी। और आप उन आने वाले दुखों को भी आसानी से सहन कर सकेंगे, तथा आप अपने बाकी जीवन को भी ठीक ढंग से जी सकेंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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Comments (1)

सविता

सविता

Jul 15, 2026

RADHE RADHE 🙏🌹