
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
106 days ago
।। ब्रह्माजी द्वारा भगवान की महिमा ।। ब्रह्माजी ने कहा नारद! यह सम्पूर्ण विश्व उन्हीं भगवान् नारायण में स्थित है जो स्वयं तो प्राकृत गुणों से रहित हैं, परन्तु सृष्टि के प्रारम्भ में माया के द्वारा बहुत से गुण ग्रहण कर लेते हैं। उन्हीं की प्रेरणा से मैं इस संसार की रचना करता हूँ। उन्हीं के अधीन होकर रुद्र इसका संहार करते हैं और वे स्वयं ही विष्णु के रूप से इसका पालन करते हैं। क्योंकि उन्होंने सत्व, रज और तम की तीन शक्तियाँ स्वीकार कर रखी हैं । नारायणे भगवति तदिदं विश्वमाहितम्। गृहीत माया उरु गुणः सर्गादौ अगुणः स्वतः।। सृजामि तन् नियुक्तोऽहं हरो हरति तद् वशः। विश्वं पुरुष रूपेण परिपाति त्रि शक्ति धृक्।। महाराज भरत बड़े ही भगवद्भक्त थे। उनके पिता भगवान् ऋषभदेव जी ने अपने संकल्पमात्र से उन्हें पृथ्वी की रक्षा करने के लिये नियुक्त कर दिया। महाराज भरत ने विश्वरूप की कन्या पंचजनी से विवाह किया। इस वर्ष (भूखंड) को जिसका नाम पहले अजनाभवर्ष था, राजा भरत के समय से ही ‘भारतवर्ष’ कहते हैं। अंत समय में हिरन का चिंतन करने से इन्हे मृगयोनि में जन्म लेना पड़ा था। भरतस् तु महा भागवतो यदा भगवतावनि तल परिपालनाय। सञ्चिन्तितस् तदनुशासन परः पञ्चजनीं विश्वरूप दुहितरमुपयेमे।। 'अजनाभं नामैतद् वर्षं भारतमिति यत आरभ्य व्यपदिशन्ति।।' कुछ लोग राजा दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र भरत के नाम पर इस भूखंड का नाम भारत पड़ा बताते हैं। जबकि पुराणों के अनुसार यह गलत तथ्य है। ।। जय भगवान श्रीहरि नारायण ।।

Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
