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Rama Devi Sahu

16 days ago

भगवान दत्तात्रेय जी :: भगवान दत्तात्रेय को सनातन धर्म में योग, ज्ञान, वैराग्य और गुरु-तत्त्व का साक्षात् स्वरूप माना गया है। उनका वर्णन विशेष रूप से Shrimad Bhagavatam, Markandeya Purana, Brahmanda Purana, Avadhuta Gita तथा अनेक उपनिषदों में मिलता है। विभिन्न पुराणों में उनकी जन्म-कथा के कुछ भेद मिलते हैं, पर सभी उन्हें महर्षि अत्रि और माता अनसूया के पुत्र तथा महान योगेश्वर के रूप में स्वीकार करते हैं। 1. महर्षि अत्रि और माता अनसूया की तपस्या:: महर्षि अत्रि ब्रह्मा जी के मानस पुत्रों में से एक थे। उनकी पत्नी माता अनसूया पतिव्रता-धर्म की परम मूर्ति थीं। उन्होंने कठोर तप करके भगवान से अपने समान दिव्य पुत्र की कामना की। श्रीमद्भागवत महापुराण (1.3.11) षष्ठः अत्रेः अपत्यम् अभूत् अनसूयायाः। दत्तात्रेयो नाम भगवान् योगविदां वरः॥ भगवान ने महर्षि अत्रि और माता अनसूया के यहाँ दत्तात्रेय रूप में अवतार लेकर अलर्क, प्रह्लाद, यदु आदि को आत्मज्ञान का उपदेश दिया। 2. भगवान दत्तात्रेय का प्राकट्य:: एक प्रसिद्ध पुराणीय कथा के अनुसार माता अनसूया के पतिव्रत-तेज से प्रसन्न होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने वरदान दिया कि वे उनके पुत्ररूप में अवतीर्ण होंगे। परिणामस्वरूप तीन पुत्र उत्पन्न हुए— सोम (चन्द्र) — ब्रह्मा का अंश दत्तात्रेय — विष्णु का अंश दुर्वासा — शिव का अंश मार्कण्डेय पुराण में यह वर्णन मिलता है कि दत्तात्रेय विष्णु के अवतार रूप में अत्रि के दूसरे पुत्र बने। 3. दत्तात्रेय नाम का अर्थ:: दत्त = दिया हुआ (वरदानस्वरूप) आत्रेय = अत्रि ऋषि का पुत्र अर्थात् अत्रि को दिए गए दिव्य पुत्र। 4. अवधूत जीवन:: बाल्यकाल से ही भगवान दत्तात्रेय संसार से विरक्त थे। वे किसी आश्रम या बंधन में नहीं रहे। वे कहते थे— न मे बन्धो न मोक्षो मे। चिदानन्दरूपोऽहम्। अर्थात् आत्मा न बंधन में है, न मुक्ति में; वह तो शुद्ध चैतन्य है। 5. राजा यदु और 24 गुरु:: राजा यदु ने दत्तात्रेय से पूछा— "आप बिना किसी गुरु के इतना ज्ञान कैसे प्राप्त कर पाए?" भगवान ने उत्तर दिया— मम गुरवो बहवः। उन्होंने बताया कि उन्होंने 24 गुरुओं से शिक्षा ली— 1. पृथ्वी 2. वायु 3. आकाश 4. जल 5. अग्नि 6. चन्द्र 7. सूर्य 8. कबूतर 9. अजगर 10. समुद्र 11. पतंगा 12. मधुमक्खी 13. हाथी 14. मधुहारी 15. हिरण 16. मछली 17. पिंगला 18. कुरर पक्षी 19. बालक 20. कुमारी 21. बाण बनाने वाला 22. सर्प 23. मकड़ी 24. भृंगी इन सब से उन्होंने वैराग्य, धैर्य, संतोष, एकाग्रता और आत्मज्ञान की शिक्षा ग्रहण की। 6. राजा अलर्क को उपदेश:: भगवान दत्तात्रेय ने राजा अलर्क को योग और आत्मज्ञान का उपदेश दिया। उन्होंने कहा— मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः। अर्थात् मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण मन ही है। यह शिक्षा योगशास्त्र की आधारभूत शिक्षाओं में मानी जाती है। 7. प्रह्लाद को उपदेश:: भगवान दत्तात्रेय ने भक्त प्रह्लाद को भी आत्मज्ञान का उपदेश दिया और समझाया कि परमात्मा बाहर नहीं, प्रत्येक जीव के हृदय में विद्यमान हैं। 8. कार्तवीर्य अर्जुन को वरदान:: राजा कार्तवीर्य अर्जुन ने भगवान दत्तात्रेय की कठोर सेवा की। प्रसन्न होकर भगवान ने उसे— सहस्र भुजाओं का बल धर्मपूर्वक राज्य करने की शक्ति अपार ऐश्वर्य का वरदान दिया। इसका उल्लेख मार्कण्डेय पुराण में मिलता है। 9. भगवान दत्तात्रेय का स्वरूप:: उनकी प्रतिमा में सामान्यतः— तीन मुख (त्रिमूर्ति-तत्त्व का प्रतीक) छह भुजाएँ पीछे गौ माता चार कुत्ते (चार वेदों के प्रतीक) दिखाए जाते हैं। हालांकि कुछ शास्त्रीय वर्णनों में उन्हें विष्णु-अवतार के रूप में एकमुखी भी बताया गया है; विभिन्न परंपराओं में उनके स्वरूप का चित्रण अलग-अलग मिलता है। 10. दत्तात्रेय का संदेश:: गुरु ही भगवान हैं। समस्त प्रकृति हमारी गुरु है। अहंकार छोड़ो। आत्मा को पहचानो। वैराग्य और भक्ति से जीवन सफल बनाओ। ॐ द्राम् दत्तात्रेयाय नमः॥ या ॐ श्री गुरुदत्तात्रेयाय नमः॥ भगवान दत्तात्रेय केवल एक अवतार ही नहीं, बल्कि गुरु-तत्त्व, योग, ज्ञान और वैराग्य के शाश्वत आदर्श हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि यदि मनुष्य विनम्र होकर प्रकृति और जीवन से सीखने लगे, तो समस्त जगत ही उसका गुरु बन सकता है।

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Comments (4)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Aug 15, 2026

🇮🇳15th August Happy Independence Day ki Aap ko Hardik Shubhkamnaye 🌹🇮🇳 Jai Hind 🇮🇳 Jai Bharat 🇮🇳

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Aug 15, 2026

Happy independence day, may this day bring prosperity and unity to our great nation! Jai hind jai bharat. Proud to be indian🇮🇳🙏

Rakesh Kumar

Rakesh Kumar

Aug 15, 2026

good morning ji 🙏