
SHREE SHARMA
433 days ago
यन्मायावशवर्ति विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरा, यत्सत्त्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाहेर्भ्रमः। यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावतां, वन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्॥ जिनकी माया के वशीभूत सम्पूर्ण विश्व, ब्रह्मादि देवता और असुर हैं, जिनकी सत्ता से रस्सी में सर्प के भ्रम की भाँति यह सारा दृश्य जगत् सत्य ही प्रतीत होता है और जिनके केवल चरण ही भवसागर से तरने की इच्छा वालों के लिए एकमात्र नौका हैं, उन समस्त कारणों के कारण और सबसे श्रेष्ठ श्री राम कहलाने वाले भगवान हरि की मैं वंदना करता हूँ जय सियाराम 🙏

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Jun 23, 2025
Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🙏 Prabhu Shri Ram Ji ki Aasirbad Aap pr Sadeib Bani Rahe 🙏🌹🌹

प्रभा त्रिपाठी
Jun 23, 2025
ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव 🌿🌹🙏
