
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
186 days ago
卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐 🌞दिनांक - 26 फरवरी 2026 ⛅दिन - गुरुवार ⛅विक्रम संवत् - 2082 ⛅अयन - उत्तरायण ⛅ऋतु - वसंत ⛅मास - फाल्गुन ⛅पक्ष - शुक्ल ⛅तिथि - दशमी रात्रि 12:33 फरवरी 27 तक तत्पश्चात् एकादशी ⛅नक्षत्र - मृगशिरा दोपहर 12:11 तक तत्पश्चात् आर्द्रा ⛅योग - प्रीति रात्रि 10:33 तक तत्पश्चात् आयुष्मान् ⛅राहुकाल - दोपहर 02:07 से दोपहर 03:34 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅सूर्योदय - 06:51 ⛅सूर्यास्त - 06:29 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में ⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:12 से प्रातः 06:02 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:17 से दोपहर 01:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 फरवरी 27 से रात्रि 01:04 फरवरी 27 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) 🌥️विशेष - दशमी को कलम्बी का शाक खाना त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🔹मन में शांति की लहरें प्रकट करनेवाली मुद्रा : शांत मुद्रा🔹 यह मुदा कोध को शांत करने में अत्यंत लाभदायी है, इसीलिए इसका नाम 'शांत मुद्रा' रखा गया है । 🔹लाभ : (१) जिसे बार-बार क्रोध आता हो या स्वभाव चिड़चिड़ा हो, उसके लिए यह मुद्रा वरदानस्वरूप है । इस मुद्रा से क्रोध तत्काल शांत हो जाता है । 🔸(२) क्रोध के स्पंदनों पर शांति के स्पंदनों का टकराव होने से शरीर का तान-तनाव कम हो जाता है । 🔸(३) मन भी आसानी से शांत हो जाता है । शांतिवर्धक लहरें तन-मन में संचारित होने लगती हैं । 🔸(४) इस मुद्रा को करने पर आप विशेष एकाग्रता का अनुभव करेंगे । 🔹विधि : (१) ध्यान के लिए अनुकूल पड़े ऐसे किसी भी आसन में बैठ जायें। आप यात्रा के समय भी किसी अनुकूल आसन में यह कर सकते हैं । 🔸(२) उँगलियों के अग्रभागों को अँगूठे के अग्रभाग से चारों तरफ से मिलायें। अँगूठे व उँगलियों को थोड़ा- सा मोड़ें, जिससे उँगलियों के अग्रभाग अँगूठे के अग्रभाग से अच्छी तरह मिल जायें । 🔸(३) अँगूठे के अग्रभाग पर एकाग्र हों और उँगलियों की सनसनी अनुभव करें । 🔸मुद्रा-विज्ञान : पाँचों उँगलियाँ मिलाने पर अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी और जल ये पाँचों तत्त्व इकट्ठे हो जाते हैं । इससे प्राणशक्ति पुष्ट होती है । ▬▬๑⁂❋⁂๑▬▬ 🚩जय श्री राम🚩 🚩धर्मो रक्षति रक्षितः 🇮🇳हिन्दू राष्ट्र भारत

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