
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
65 days ago
विपत्ति में जब अपने भी साथ छोड़ दें, तब केवल 'नारायण' ही आते हैं बचाने! 🌺 जानिए गजेन्द्र और ग्राह (मगरमच्छ) के पूर्व जन्म का रहस्य। 👇 🌺 गजेन्द्र मोक्ष: जब अहंकार टूटा और नारायण दौड़े चले आए! 🌺 श्रीमद्भागवत महापुराण के आठवें स्कन्ध में वर्णित 'गजेन्द्र मोक्ष' की कथा केवल एक कहानी नहीं, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा सार है। यह हमें सिखाती है कि जब इंसान का अपना बल और अहंकार टूट जाता है, तब भगवान की कृपा कैसे बरसती है। 🐘 त्रिकूट पर्वत का वह अभिमानी गजेन्द्र क्षीर सागर में स्थित त्रिकूट पर्वत के घने जंगलों में गजेन्द्र नाम का एक अति बलशाली और मत्त हाथी अपनी हथिनियों के साथ रहता था। एक दिन प्यास बुझाने और जल-क्रीड़ा करने वह एक विशाल सरोवर में उतरा। 🐊 काल (मगरमच्छ) का प्रहार और भयंकर युद्ध तभी सरोवर में रहने वाले एक विशाल मगरमच्छ (ग्राह) ने गजेन्द्र का पैर अपने मजबूत जबड़ों में जकड़ लिया। गजेन्द्र ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। उसकी पत्नियों ने बाहर से विलाप किया, लेकिन कोई उसकी मदद न कर सका। मगरमच्छ जल का जीव था, इसलिए उसकी ताकत बढ़ती गई, और गजेन्द्र कमज़ोर होता गया। यह संघर्ष पूरे 1,000 वर्षों तक चला! 🙏 अहंकार का अंत और ईश्वर को पुकार अंततः गजेन्द्र का शरीर कंकाल मात्र रह गया। जब उसे लगा कि अब बचने का कोई उपाय नहीं है और दुनिया का कोई भी रिश्ता उसे मौत से नहीं बचा सकता, तब उसका अभिमान टूटा। उसने पूर्ण समर्पण के साथ पुकारा— "हे अनाथों के नाथ! हे सृष्टि के मूल! मेरा बल अब जवाब दे चुका है। मेरे प्राण सूख रहे हैं। अब आप बचाएं या छोड़ दें, मेरी रक्षा करने वाला आपके सिवा कोई नहीं है।" ✨ भगवान विष्णु का आगमन और मोक्ष गजेन्द्र की आर्त पुकार (सच्चे मन की प्रार्थना) सुनकर भगवान श्री हरि गरुड़ पर सवार होकर तुरंत प्रकट हुए। उन्होंने अपना 'सुदर्शन चक्र' छोड़ा और मगरमच्छ का सिर धड़ से अलग कर दिया। भगवान ने अपने हाथों से गजेन्द्र का स्पर्श किया, जिससे उसे न सिर्फ नया जीवन मिला, बल्कि पूर्व जन्म का ज्ञान भी हो गया। 📜 क्या था पूर्व जन्म का रहस्य? मगरमच्छ (ग्राह): पूर्व जन्म में 'हुहू' नामक गंधर्व था, जिसे देवल ऋषि ने मगरमच्छ बनने का श्राप दिया था। सुदर्शन चक्र से कटकर उसका उद्धार हुआ। गजेन्द्र (हाथी): पूर्व जन्म में इंद्रद्युम्न नामक विष्णुभक्त राजा थे। एक बार ध्यान में मग्न होने के कारण उन्होंने अगस्त्य मुनि का स्वागत नहीं किया था, जिससे उन्हें हाथी बनने का श्राप मिला था। हरि के स्पर्श से उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ। 🌟 माहात्म्य (इस कथा को पढ़ने का फल): श्रीमद्भागवत के अनुसार, जो भी व्यक्ति कलियुग में 'गजेन्द्र मोक्ष' की इस पावन कथा को पढ़ता या सुनता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं, बुरे स्वप्न दूर होते हैं और उसे स्वर्ग तथा यश की प्राप्ति होती है।

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