
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
186 days ago
25.2.2026 लोग चाहते हैं दूसरों के साथ हमारा संबंध सदा बना रहे, सुदृढ़ हो, जिससे हमें दूसरे लोगों से जीवन भर लाभ मिलता रहे। लोग यह तो सोचते हैं, कि *"हमें दूसरों से जीवन भर लाभ मिलता रहे। परंतु उनके साथ संबंध को टिकाए रखने के जो नियम हैं, उन नियमों का पालन करना नहीं चाहते।"* इसका कारण है, *"उनका स्वार्थ मूर्खता हठ दुराग्रह क्रोध लोभ ईर्ष्या छल कपट आदि दोष।"* *"जो व्यक्ति अपने इन दोषों को दूर नहीं करता और दूसरों के साथ न्यायपूर्वक प्रेमपूर्वक व्यवहार नहीं करेगा, उसका संबंध दूसरों के साथ लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा, टूट जाएगा।"* प्रेम से व्यवहार करने का अर्थ है, *"एक दूसरे के प्रति समर्पण, अर्थात बुद्धिमत्ता और न्याय से सब व्यवहार करना।"* यदि आप चाहते हों, कि *"आपके संबंध दूसरों के साथ लंबे समय तक टिके रहें, दूसरों से आपको जीवन भर लाभ मिलता रहे, तो संबंध बनाए रखने के नियमों का पालन करें।" "दूसरों के साथ समर्पित भाव से सभ्यतापूर्वक नम्रतापूर्वक प्रेमपूर्वक शुद्ध मन से छल कपट आदि दोष रहित होकर अच्छा व्यवहार करें। तभी आपका संबंध दूसरों के साथ जीवन भर टिका रह सकता है, और आपको दूसरों से जीवन भर लाभ मिल सकता है, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Comments (2)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Feb 25, 2026
जय श्री गणेश जी शुभप्रभात जी 🙏

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩
Feb 25, 2026
ॐ वक्र टुंड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ निर्विघ्न कुरु म देव सर्व कार्यशू सर्वदा जय गणेश आशीर्वाद कृपा से सपरिवार को दीर्घायु यश वैभव सुख शांति समृद्धि प्रदान हो 🥀🙏🕉️🙏🙏🙏🕉️🥀🥀🌺🌺👌👌
