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*स्कूल में ऐसी शिक्षिका हो तो क्या ही कहने...* निश्चित रूप से। हनुमान अमृतवाणी की ये पंक्तियाँ मन को शांति और शक्ति देने वाली हैं। आप इसे पढ़ सकते हैं या बच्चों को भी सुना सकते हैं: श्री हनुमान अमृतवाणी (मुख्य अंश) मंगल्मूर्ती मारुति नंदन, सकल अमंगल मूल निकंदन। पवन तनय संतन हितकारी, हृदय विराजत अवध बिहारी॥ * शक्ति का प्रतीक: हनुमान नाम का सुमिरन करके, संकट सारे मिट जाते हैं। जो भी शरण में आता उनकी, बिगड़े काम बन जाते हैं। * बुद्धि और ज्ञान: अतुलित बल धामाम हेम शैलाभ देहम, दनुज वन कृशानुम ज्ञानिनाम अग्रगण्यम। सकल गुण निधानम वानराणाम धीशम, रघुपति प्रिय भक्तम वातजातम नमामि॥ * कल्याणकारी भाव: दुःख भंजन मारुति नंदन, कष्ट हरो हे दुःख भंजन। सबकी नैया पार लगाओ, हे बजरंगी कृपा बरसाओ॥ इस वाणी का प्रभाव: स्कूल जैसे पवित्र स्थान पर जब ऐसी वाणी गूँजती है, तो बच्चों का मन चंचलता छोड़कर एकाग्रता (Focus) की ओर बढ़ता है। ऐसी शिक्षिका वास्तव में बच्चों को केवल साक्षर नहीं, बल्कि 'शिक्षित' और 'सभ्य' बनाती हैं। > एक छोटा सा सुझाव: अगर आप चाहें, तो मैं इन पंक्तियों का सरल अर्थ भी समझा सकता हूँ ताकि आप बच्चों को इसके पीछे का गहरा संदेश

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