
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
185 days ago
27.2.2026 *"व्यक्ति दिन भर या तो संसार से प्रभावित रहता है या ईश्वर से।"* *"यदि वह संसार से प्रभावित रहता है, तो वह संसार के लोगों की नकल करता है, अर्थात झूठ छल कपट हेरा फेरी आदि बुरे काम करता रहता है। कुछ अच्छे काम भी करता है। परन्तु बुरे काम करने के कारण वह पूरी तरह से निर्भय होकर अपना जीवन नहीं जी पाता।"* *"जब वह अच्छे काम करता है, तो उसको ईश्वर अंदर से आनंद उत्साह निर्भयता की अनुभूति उत्पन्न करता है। और जब वह बुरे काम करता है तो भय शंका लज्जा चिंता तनाव इत्यादि ऐसी अनुभूतियां उत्पन्न करता है।"* *"दूसरे पक्ष में, जो व्यक्ति ईश्वर से प्रभावित रहता है, सारा दिन ईश्वर को साक्षी मानकर काम करता है, उसके सब काम अच्छे होते हैं। वह बुरे काम नहीं कर सकता। जैसे पुलिस के सिपाही की उपस्थिति में व्यक्ति कोई गलत काम नहीं करता। ऐसे ही उसे ईश्वर पुलिस मैन की तरह दिखता है। इसलिए वह कोई बुरा काम नहीं करता। उस को संसार का राग द्वेष छू नहीं सकता। वह सदा उत्साहित प्रसन्न निश्चिंत तनाव मुक्त और निर्भय होकर अपना जीवन जीता है। यही जीवन वास्तविक जीवन है। सबको ऐसा प्रयास करना चाहिए। अन्यथा पाप कर्मों से बचना असंभव है।"* *"जो व्यक्ति ऊपर बताया गया उत्तम पुरुषार्थ करेगा, उसको ऊपर बताए प्रसन्नता निश्चिंतता तनाव मुक्ति आदि फल मिलेंगे। जो व्यक्ति पुरुषार्थ नहीं करेगा, उसको नहीं मिलेंगे।"* *"अब आप देखिए आपको दो में से कौन सा रास्ता पसंद है। जो पसंद हो, उस पर चलिए।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Comments (2)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Feb 27, 2026
जय श्री राधे कृष्णा जी

vijay kushwaha
Feb 27, 2026
जय श्री राधे कृष्ण
