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*"अब दौर" बदल गया है पहले "झूठ" बोलने से पाप लगता था और अब "सच"बोलने से आग लगती हैं' गलत लोग गलत कर के भी"अकड़" कर चलते है जबकि"सही लोग"झूठे" "इल्जाम" सें हीं टूट जाते हैं गलत "वक्त" पर "सही"बात कहना भी "गलत" होता हैं जब तक मुसीबत का पता नहीं चले तब तक ही "सुकून" है "जिंदगी" में दो चम्मच हँसी और चुटकी भर मुस्कान बस यही खुराक है ख़ुशी की पहचान "अंधेरे में छाया बुढ़ापे में काया"और अन्त समय में "माया" किसी का साथ नहीं देती "जीवन" में कुछ भी स्थायी नहीं है इसलिए "स्वयं" को "तनावग्रस्त"न करें क्योंकि "परिस्थितियां" चाहे कितनी भी खराब हों बदलेंगी "जरूर"* *💫🌹 जय श्री राम 🌹💫* *💫🌹 शुभ प्रभात 🌹💫*

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