
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
20 hours ago
🙏 ऐसी ही थीं हमारी वीरांगनाएं। 🙏🚩 बाईसा *किरण देवी* की ये कहानी हर राजस्थानी घर में गर्व से सुनाई जाती है - महाराणा प्रताप के छोटे भाई शक्ति सिंह जी की बेटी, और बीकानेर के पृथ्वीराज राठौड़ की पत्नी। कहते हैं अकबर मीना बाजार / नौ रोज मेले में वेश बदल कर आता था, वहां धोखे से किरण देवी को जनाना महल में बुलाया। जैसे ही अकबर ने मर्यादा लांघने की कोशिश की, बाईसा ने कमर से कटार निकाली और उसकी छाती पर पैर रख दिया। और वही गर्जना की जो आपने वीडियो में सुनी - > *"तुझे पता नहीं मैं उन महाराणा प्रताप की भतीजी हूँ जिनके नाम से तेरी नींद उड़ जाती है!"* अकबर ने हाथ जोड़ कर माफी मांगी, और उसी दिन से दिल्ली में मीना बाजार का मेला बंद करना पड़ा। ये चित्र आज भी जयपुर के सिटी पैलेस म्यूजियम में "किरण देवी द्वारा अकबर को परास्त करना" के नाम से बताया जाता है। चाहे इतिहास की किताबों में इसका ज़िक्र कम हो, पर हमारे लोकगीतों, कविताओं में ये जिंदा है - _किरण सिंघनी सी चढ़ी उर पर, खींच कटार।_ _भीख मांगता प्राण की, अकबर हाथ पसार।।_ ऐसी ही थीं हमारी दादियां-परदादियां - हाथ में चूड़ियां भी थीं और जरूरत पड़ने पर कटार भी। शर्म भी थी, शौर्य भी था। जय राजपुताना, जय सनातन! 🚩
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