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17.2.2026 दो व्यक्तियों का संबंध, चाहे पिता पुत्र का हो, चाहे माता पुत्री का हो, दो भाइयों का हो, दो बहनों का हो, भाई और बहन का हो, पति-पत्नी का हो, या दो मित्रों का हो। किन्हीं भी दो व्यक्तियों का पवित्र संबंध हो। *"यदि दोनों का मन शुद्ध हो, दोनों ईमानदारी से परस्पर व्यवहार करते हों, एक दूसरे को सुख देते हों, तो यह पवित्र संबंध जैसे-जैसे पुराना होता जाता है, उसकी पवित्रता एवं दृढ़ता में अधिक अधिक निखार आता जाता है। दूसरे व्यक्ति के प्रति सम्मान बढ़ता जाता है। धीरे-धीरे उनकी आपसी समझ इतनी बढ़ जाती है, कि थोड़े ही शब्दों में काम चल जाता है। संकेत मात्र से ही एक व्यक्ति दूसरे के मन के भाव समझ जाता है। ऐसी स्थिति में उन दोनों को बहुत आनंद होता है। इसका परिणाम यह होता है, कि वह पवित्र संबंध बहुत सुदृढ़ हो जाता है, और जीवन भर सुख देता है।"* *"आप भी यदि कुछ ऐसा प्रयत्न करें, तो आपके भी अन्यों के साथ संबंध पवित्र सुखमय एवं सुदृढ़ हो सकते हैं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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