
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
177 days ago
"संगति के प्रभाव"** (अथवा साथ का असर) के बारे में एक बहुत ही सुंदर और गहरे अर्थ वाला संदेश देता है। इसमें कबीर दास जी के प्रसिद्ध दोहे का भाव समझाया गया है। संदेश का विस्तार से अर्थ दिया गया है: ## **मुख्य दोहा** > **कदली, सीप, भुजंग-मुख, स्वाति एक गुन तीन।** > **जैसी संगति बैठिए, तैसोई फल दीन॥** > ### **इसका भावार्थ:** यह पंक्तियाँ बताती हैं कि स्वाति नक्षत्र में गिरने वाली वर्षा की बूँद तो एक ही होती है, लेकिन वह **जिसके साथ मिलती है (संगति करती है)**, वैसा ही रूप ले लेती है: 1. **कदली (केला):** अगर वह बूँद केले के पेड़ पर गिरती है, तो वह **कपूर** बन जाती है। 2. **सीप:** अगर वही बूँद समुद्र में सीप के अंदर गिरती है, तो वह मूल्यवान **मोती** बन जाती है। 3. **भुजंग-मुख (साँप का मुँह):** अगर वही बूँद साँप के मुँह में गिरती है, तो वह घातक **विष (जहर)** बन जाती है। ### **निष्कर्ष (Message):** बूँद वही है, उसके गुण वही हैं, लेकिन **संगति** ने उसका भविष्य और स्वरूप बदल दिया। ठीक इसी तरह, इंसान भी वैसा ही बनता है जैसी उसकी संगति होती है। * यदि आप अच्छे और विद्वान लोगों के साथ रहेंगे, तो आपका जीवन मोती जैसा चमकेगा। * यदि आप गलत साथ चुनेंगे, तो परिणाम भी विनाशकारी (विष के समान) होगा। यह हमें याद दिलाता है कि हमें अपने मित्र और अपना परिवेश बहुत सोच-समझकर चुनना चाहिए क्योंकि **हमारी संगति ही हमारा भविष्य तय करती है।**

Comments (1)

Savita om namah shivay 🙏🌹
Apr 16, 2026
Radhe Radhe 🙏
