
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
250 days ago
*रागादिदोषरहितं स्वजनानुरागं* *वैराग्यशान्तिनिलयं गिरिजासहायम्।* *माधुर्यधैर्यसुभगं गरलाभिरामं* *वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्।।* *आशां विहाय परिहृत्य परस्य निन्दां* *पापे रतिं च सुनिवार्य मन: समाधौ* *आदाय हृत्कमलमध्यगतं परेशं* *वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्।।* जो रागादि दोषों से रहित हैं, अपने भक्तों पर कृपा रखते हैं, वैराग्य और शान्ति के स्थान हैं, पार्वती जी सदा जिनके साथ रहती हैं, जो धीरता और मधुर स्वभाव से सुन्दर जान पड़ते हैं तथा जो कण्ठ में गरल के चिन्ह से सुशोभित हैं,उन काशीपति श्रीविश्वनाथ जी की पूजा करें। सब आशाओं को छोड़कर, दूसरों की निन्दा त्यागकर और पापकर्म से अनुराग हटाकर,चित्त को समाधि में लगाकर,हृदयकमल में प्रकाशमान परमेश्वर काशीपति भगवान् श्रीविश्वनाथ जी की पूजा करें।' *🌿🌹 शुभदुपेहर्🌿🌹* 🙏
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
