
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
171 days ago
काला-गोरा भैरव: शिव के दो स्वरूप, एक विनाशक तो दूसरा पालक तंत्र और भक्ति के जगत में भगवान भैरव के अनेक रूप हैं, लेकिन काला और गोरा भैरव की जोड़ी सबसे रहस्यमयी और शक्तिशाली मानी जाती है। अक्सर भक्त इनके बीच के भेद और इनकी कथा को जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। आज जानते हैं इनके अद्भुत रहस्य और कथा के बारे में: काला भैरव (विनाशक स्वरूप/तामसिक स्वरूप): यह भगवान शिव का रौद्र और तामसिक स्वरूप है। इनकी उत्पत्ति शिव के क्रोध से हुई थी। • प्रतीक: यह मृत्यु, भय और समय (काल) के देवता हैं। • कथा: जब ब्रह्मा जी को अपने सृजन पर अहंकार हो गया था, तब शिव जी के क्रोध से 'काल भैरव' प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्मा जी का पांचवा सिर काट दिया। इस कारण उन पर 'ब्रह्महत्या' का पाप लगा। यह स्वरूप उग्र है, मदिरा का भोग ग्रहण करता है और शत्रुओं/बुरी शक्तियों का नाश करता है। गोरा भैरव (बटुक/सात्विक स्वरूप): यह भगवान भैरव का सौम्य, सात्विक और बाल स्वरूप है। इन्हें 'बटुक भैरव' भी कहा जाता है। • प्रतीक: यह अभय, शांति और सिद्धि प्रदान करने वाले हैं। • कथा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब काल भैरव को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली (काशी में), तो उनका क्रोध शांत हुआ और वे सौम्य हो गए। गोरा भैरव दूध, खीर और मिष्ठान का भोग ग्रहण करते हैं। जहाँ काला भैरव भूतों-प्रेतों को नियंत्रित करते हैं, वहीं गोरा भैरव अपने भक्तों की रिद्धि-सिद्धि और सुरक्षा का ध्यान रखते हैं। काला-गोरा भैरव का साथ (रहस्य): राजस्थान और उज्जैन की लोक परंपराओं में इन्हें अक्सर एक साथ पूजा जाता है। यह माना जाता है कि 'काला भैरव' बुरी बाधाओं को काटकर रास्ता साफ करते हैं और उनके पीछे आने वाले 'गोरा भैरव' उस खाली स्थान को सुख, समृद्धि और ज्ञान से भर देते हैं। एक कड़क है, तो दूसरा नरम। एक दंड देता है, तो दूसरा दुलार करता है। यही शिव की लीला है! मंत्र: ॐ कालभैरवाय नमः || ॐ बटुक भैरवाय नमः || 🚩 जय श्री महाकाल | जय भैरव बाबा 🚩

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