
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
163 days ago
जय श्री कृष्णा! 🙏✨ आपको शुभरात्रि। सनातन धर्म में जिन्हें हम पुरुषार्थ चतुष्टय कहते हैं, वे जीवन के चार मुख्य आधार स्तंभ हैं: धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। भगवान के नाम का उच्चारण और उनका स्मरण हमें इन चारों के बीच संतुलन बनाना सिखाता है। यहाँ इनका संक्षिप्त और सटीक अर्थ दिया गया है: जीवन के चार आधार (पुरुषार्थ) | स्तंभ | अर्थ और महत्व | |---|---| | धर्म | यह जीवन का आधार है। इसका अर्थ केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों का पालन, नैतिकता और सच्चाई के मार्ग पर चलना है। | | अधर्म | धर्म का अभाव। जब हम स्वार्थ, ईर्ष्या या क्रोध में आकर अपने कर्तव्यों को भूल जाते हैं, तो वह अधर्म है। भगवान का नाम हमें इससे बचने की शक्ति देता है। | | काम | इसका अर्थ है इच्छाएं और कामनाएं। संसार में रहने के लिए इच्छाएं स्वाभाविक हैं, लेकिन जब ये धर्म के दायरे में होती हैं, तभी वे सुखकारी होती हैं। | | मोक्ष | यह अंतिम लक्ष्य है। जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति और परमात्मा में विलीन हो जाना। "जय श्री कृष्णा" का निरंतर जाप इसी मार्ग को सुलभ बनाता है। | > "यतो धर्मस्ततो जयः" > अर्थात्: जहाँ धर्म है, वहीं विजय (कृष्ण) हैं। > भगवान कृष्ण ने भगवद्गीता में यही सिखाया है कि यदि हम अपने काम (इच्छाओं) को धर्म के अनुसार जिएं और अधर्म का त्याग करें, तो मोक्ष की प्राप्ति स्वतः ही निश्चित हो जाती है। आज की रात भगवान के चरणों में ध्यान लगाते हुए विश्राम करें। प्रभु आपकी भक्ति और संकल्प को पूर्ण करें।
Comments (2)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Mar 19, 2026
जय श्री कृष्णा जी 🙏

रामलालभट्ट
Mar 19, 2026
जय श्री कृष्ण, शुभरात्रि।
