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27.3.2026 लोग अपनी संपत्ति बढ़ाने में लगे हैं। खूब धन कमाते हैं, और यह सोचते हैं, कि *"जितना धन हमारे पास अधिक होगा, हम उतने ही अधिक सुखी हो जाएंगे।"* परंतु यह उनकी भ्रांति है। हमने देखा है, *"संसार में जो जितना बड़ा धनवान है, वह उतना ही अधिक तनाव ग्रस्त है, दुखी है, परेशान है, चिंताओं से घिरा हुआ है। इसलिए बहुत अधिक धन नहीं कमाना चाहिए।" "आवश्यकता के अनुकूल कमाना चाहिए। और मेहनत से पुरुषार्थ करने पर यदि धन अधिक आ भी जाए, तो उसे योग्य पात्रों को दान कर देना चाहिए।" "जो आप दान कर देंगे, बस वही संपत्ति आपकी असली है। वह आपके साथ अगले जन्म में जाएगी और आपको उसका फल अगले जन्म में मिलेगा।" "जो संपत्ति आप यहां बैंक में जमा कर देंगे, वह तो यहीं रह जाएगी। इसलिए आपकी असली संपत्ति वही है, जो आपने दान कर दी।"* संसार में अनेक प्रकार के रोग हैं। *"कुछ शारीरिक रोग हैं, जैसे सर्दी जुकाम खांसी बुखार इत्यादि। और कुछ मानसिक रोग हैं। जैसे लोभ लालच काम क्रोध इत्यादि।" "इनमें लोभ लालच सबसे बड़ा रोग है। जिसके कारण संसार में बहुत अन्याय होता रहा है, आज भी हो रहा है, और आगे भी होगा। इसलिए लोभ लालच से बचना चाहिए।"* *"व्यक्ति अपनी सुंदरता बढ़ाने के लिए आभूषण धारण करता है। सोने के आभूषणों से व्यक्ति की सुंदरता बहुत अधिक नहीं होती। अच्छे स्वभाव के कारण व्यक्ति की सुंदरता बहुत बढ़ती है। इसलिए सबसे अच्छा आभूषण है, उत्तम स्वभाव। अतः अपने स्वभाव को अच्छा बनाना चाहिए।"* और संसार में सबसे उत्तम सुख मिलता है संतोष का पालन करने से। *"धन आदि भौतिक संपत्तियों से थोड़ा सा सुख मिलता है। बहुत सा धन कमा कर भी यदि व्यक्ति को संतोष नहीं है, तो वह सुखी नहीं हो पाएगा।" "दूसरी ओर थोड़े से साधन प्राप्त करके भी यदि कोई व्यक्ति संतोष का पालन करता है, तो वह बहुत अधिक सुखी होता है। इसलिए सुखी होने के लिए संतोष का पालन अवश्य करें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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