
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
104 days ago
**अधिक मास (Adhik Maas)**, जिसे **पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas)** भी कहा जाता है, के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व को बहुत ही सुंदर तरीके से दर्शाता है। यहाँ जानिए कि अधिक मास क्यों इतना खास और महत्वपूर्ण माना जाता है: ### 1. वैज्ञानिक और खगोलीय आधार (Scientific & Astronomical Reason) सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के अंतर को बहुत स्पष्ट रूप से समझाया गया है: * **सौर वर्ष (Solar Year):** सूर्य चक्र पर आधारित वर्ष **365 दिनों** का होता है। * **चंद्र वर्ष (Lunar Year):** हिंदू पंचांग के अनुसार चंद्र चक्र पर आधारित वर्ष **354 दिनों** का होता है। * **11 दिनों का अंतर:** इन दोनों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है। इस अंतर को पाटकर दोनों कैलेंडरों में संतुलन बनाए रखने के लिए हर **तीसरे वर्ष** में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे **अधिक मास** या **मलमास** कहते हैं। ### 2. भगवान विष्णु का वरदान: "पुरुषोत्तम मास" पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिंदू कैलेंडर के अन्य सभी 12 महीनों के कोई न कोई अधिपति देवता हैं। चूंकि यह एक अतिरिक्त महीना था, इसलिए किसी भी देवता ने इसका स्वामित्व स्वीकार नहीं किया। * जब इस उपेक्षित महीने ने भगवान विष्णु (श्रीहरि) से गुहार लगाई, तो उन्होंने इसे अपना अत्यंत प्रिय नाम **"पुरुषोत्तम"** दिया। * भगवान विष्णु के नाम पर होने के कारण इस पूरे महीने में पूजा-पाठ, दान, और आध्यात्मिक साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है। ### 3. हिरण्यकशिपु का वध और धार्मिक महत्व अधिक मास का सीधा संबंध भगवान विष्णु के **नरसिंह अवतार** से भी है: * दैत्य राजा हिरण्यकशिपु को ब्रह्मा जी से वरदान मिला था कि वह वर्ष के **12 महीनों** में से किसी भी महीने में नहीं मारा जा सकता। * इस वरदान की मर्यादा रखते हुए और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त कराने के लिए, भगवान नरसिंह ने इस **13वें महीने (अधिक मास)** में प्रकट होकर संध्या के समय उसका वध किया था। ### निष्कर्ष जिसे संसार ने 'अतिरिक्त' या 'व्यर्थ' समझकर ठुकरा दिया था, उसे श्रीहरि ने अपना नाम देकर सबसे पावन बना दिया। यही कारण है कि अधिक मास में धार्मिक अनुष्ठान, व्रत और नाम-सिमरण का विशेष महत्व है, क्योंकि यह समय भौतिकता से ऊपर उठकर आत्मिक शुद्धि की ओर बढ़ने का होता है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
