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भगवान शिव के गले में सुशोभित नागराज **वासुकी** का हिंदू धर्म ग्रंथों और पुराणों में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। उनके बारे में मुख्य बातें इस प्रकार हैं: ## १. नागों के राजा वासुकी को नागलोक का राजा माना जाता है। वे महर्षि कश्यप और कद्रू के पुत्र हैं। वे सभी नागों में सबसे शक्तिशाली और पूजनीय माने जाते हैं। ## २. भगवान शिव के परम भक्त पौराणिक कथाओं के अनुसार, वासुकी भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें अपने गणों में शामिल किया और उन्हें आभूषण के रूप में अपने गले में धारण करने का वरदान दिया। ## ३. समुद्र मंथन में महत्वपूर्ण भूमिका वासुकी का सबसे प्रमुख उल्लेख 'समुद्र मंथन' की कथा में मिलता है: * जब देवताओं और असुरों ने अमृत के लिए समुद्र को मथने का निर्णय लिया, तब वासुकी नाग को ही **नेति (रस्सी)** के रूप में मंदराचल पर्वत के चारों ओर लपेटा गया था। * एक तरफ से देवताओं और दूसरी तरफ से दानवों ने उन्हें खींचकर समुद्र मंथन किया था। ## ४. विष और नीलकंठ की कथा मंथन के दौरान जब 'हलाहल' नामक भयंकर विष निकला, तब उसकी गर्मी और प्रभाव से वासुकी भी झुलसने लगे थे। संसार को बचाने के लिए भगवान शिव ने उस विष को पी लिया। वासुकी की सेवा और सहनशक्ति को देखते हुए शिवजी ने उन्हें सदैव अपने पास रखने का स्थान दिया। **एक रोचक तथ्य:** वासुकी की एक बहन भी हैं जिनका नाम **मनसा देवी** है, जिन्हें नागों की देवी के रूप में पूजा जाता है। वासुकी को उनकी उदारता और तपस्या के कारण नाग जाति का रक्षक माना जाता है।

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Comments (1)

Harendra  Sharma

Harendra Sharma

Apr 18, 2026

part 1 भी पोस्ट कीजिए सर जी