
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
129 days ago
22.4.2026 ईश्वर में ज्ञान बाल आनन्द न्याय दया सेवा परोपकार आदि आदि सैकड़ों प्रकार के गुण और शक्तियां हैं। हम जीवात्मा लोग उसके पुत्र शिष्य आदि हैं। *"क्योंकि वैदिक शास्त्रों में ईश्वर को माता-पिता गुरु आचार्य राजा और न्यायाधीश आदि आदि इन अनेक स्वरूपों में स्वीकार किया गया है।"* तो ईश्वर के साथ जो हमारे ये संबंध हैं। इन पर गहराई से विचार करें। इनमें से आपको जो भी संबंध अच्छा लगे, वही संबंध बनाकर ईश्वर से प्रार्थना करें कि *"हे ईश्वर! आप हमारे माता-पिता गुरु आचार्य राजा और न्यायाधीश हैं। आप हमारी सब प्रकार से रक्षा करें। हमारी बुद्धि को बढ़ाएं। हमें पवित्र मार्ग पर चलावें। न्याय एवं सत्य आचरण के मार्ग पर चलावें, जिससे कि हम सदा सुखी रहें। बुरे काम कभी न करें, जिससे कि आपके न्यायालय में हमें दंड का पात्र न बनना पड़े।"* *"इस प्रकार से ईश्वर से प्रार्थना भी करें, और व्यवहार में अपने कार्यों की सिद्धि के लिए पूरा पुरुषार्थ भी करें।"* यदि आप ऐसा करेंगे, तो *"ईश्वर माता-पिता के समान सबका रक्षक है ही। वह आपकी हमारी सब की रक्षा करेगा। सबको उत्तम गुणों से मालामाल कर देगा।"* *"अतः बुराइयों से बचें और अच्छे काम करें। ईश्वर से लाभ उठाकर अपने जीवन को सफल बनाएं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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