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बुजुर्गों की यह बात न केवल अनुशासन, बल्कि स्वास्थ्य और शिष्टाचार के नजरिए से भी बहुत गहरी है। पुराने समय में भोजन को एक 'साधना' की तरह माना जाता था, और चुपचाप खाना खाने के पीछे कई ठोस कारण रहे हैं: 1. पाचन और स्वास्थ्य जब हम शांति से बिना बोले खाना खाते हैं, तो हमारा पूरा ध्यान भोजन के स्वाद और उसकी बनावट पर होता है। इससे शरीर में पाचन रस (digestive enzymes) सही तरीके से बनते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, एकाग्र होकर खाने से भोजन शरीर को पूरी ऊर्जा देता है। 2. सुरक्षा (Safety) बात करते हुए खाने से भोजन की नली में खाना फंसने या सांस की नली में जाने का खतरा रहता है। जिसे हम 'धसका' लगना कहते हैं, वह अक्सर खाते समय बोलने की वजह से ही होता है। 3. कृतज्ञता का भाव शांति से खाने का अर्थ है उस अन्न का सम्मान करना। जब हम चुप रहते हैं, तो हम अनजाने में उस भोजन के लिए आभार महसूस करते हैं जो हमारी थाली तक पहुँचा है। यह मन को शांत रखने का एक तरीका भी है। 4. माइंडफुल ईटिंग (Mindful Eating) आजकल जिसे 'माइंडफुल ईटिंग' कहा जाता है, वह हमारे बुजुर्गों ने सदियों पहले सिखा दिया था। जब आप चुपचाप खाते हैं, तो आपको जल्दी पता चल जाता है कि आपका पेट भर गया है, जिससे आप जरूरत से ज्यादा (overeating) नहीं खाते। भोजन के समय ध्यान रखने योग्य कुछ अन्य पारंपरिक बातें: * बैठने का तरीका: जमीन पर चौकड़ी मारकर बैठना पाचन के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। * हाथों का उपयोग: हाथों से खाना खाने से स्पर्श की अनुभूति होती है, जो मस्तिष्क को तृप्ति का संकेत देती है। * साफ-सफाई: भोजन से पहले और बाद में अच्छी तरह हाथ धोना और कुल्ला करना अनिवार्य माना गया है। बुजुर्गों की इन बातों के पीछे छिपा विज्ञान वास्तव में काफी गहरा है। जब हम चुपचाप और शांति से बैठकर भोजन करते हैं, तो हमारे शरीर में कई सूक्ष्म बदलाव होते हैं: 1. 'ग्लूकोज रिस्पॉन्स' और इंसुलिन (Insulin Management) जब हम शांति से खाते हैं, तो हम खाने को अच्छी तरह चबाते हैं। लार (saliva) में मौजूद एंजाइम्स कार्बोहाइड्रेट को मुँह में ही तोड़ना शुरू कर देते हैं। इससे शरीर का ग्लूकोज लेवल अचानक से नहीं बढ़ता, जिससे डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा कम होता है। 2. 'वेगस नर्व' (Vagus Nerve) का सक्रिय होना यह नस हमारे मस्तिष्क को पाचन तंत्र से जोड़ती है। जब हम बिना किसी शोर-शराबे या बातचीत के खाते हैं, तो यह नर्व सक्रिय होकर पेट को संकेत देती है कि खाना आ रहा है। इससे पेट में सही मात्रा में एसिड बनता है, जिससे एसिडिटी या गैस की समस्या नहीं होती। 3. लेप्टिन हार्मोन (The Satiety Signal) हमारे दिमाग को यह समझने में लगभग 20 मिनट लगते हैं कि पेट भर गया है। अगर हम बात करते हुए या जल्दबाजी में खाते हैं, तो हम इस संकेत को मिस कर देते हैं। चुपचाप खाने से हम अपने शरीर के 'लेप्टिन' (Leptin) हार्मोन के संकेतों को बेहतर समझ पाते हैं, जो वजन नियंत्रण में बहुत सहायक है। खाने के दौरान कुछ अन्य उपयोगी नियम: | नियम | वैज्ञानिक लाभ | |---|---| | नीचे बैठकर खाना | सुखासन में बैठने से रक्त संचार पेट की तरफ बढ़ता है, जिससे पाचन तेज होता है। | | हाथ से खाना | उंगलियों के पोरों में मौजूद नर्व एंडिंग्स दिमाग को बताती हैं कि खाना कैसा है (गर्म, ठंडा, सख्त), जिससे शरीर तैयार रहता है। | | भोजन के तुरंत बाद पानी न पीना | इसे 'जठराग्नि' शांत होना कहते हैं; विज्ञान के अनुसार इससे पाचक एंजाइम्स पतले हो जाते हैं और खाना देर से पचता है। | इन पारंपरिक नियमों को आज की जीवनशैली में अपनाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन यह लंबे समय में दवाइयों से बचने का सबसे सरल तरीका है।

Comments (6)

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Mar 27, 2026

बहुत हि सुंदर जी धन्यायवाद जी

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Mar 27, 2026

धन्यावाद जी 🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Mar 27, 2026

Bahut hi Sundar Barta 👌👌 Dhanyawad Jii 🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Mar 27, 2026

*गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के 10 प्रभावी टिप्स* 1. *सुबह उठकर पानी पीना*: सुबह उठते ही 1 ग्लास ठंडा (साधारण माठ का) पानी पीना चाहिए। 2. *नींबू पानी*: अगर संभव हो तो रोज सुबह खाली पेट नींबू पानी पीना चाहिए। 3. *ताक का सेवन*: शरीर को ठंडक देने के लिए रोज 1-2 बार ताक जरूर पीना चाहिए। 4. *नारियल पानी*: नारियल का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है, इसे अपने दैनिक आहार में शामिल करें। 5. *पर्याप्त पानी पीना*: घर से बाहर निकलने से पहले हमेशा भरपूर पानी पीकर निकलें। 6. *कपड़े पहनें*: धूप में बाहर जाते समय सिर पर रुमाल या टोपी लगाकर सिर को ढकें। 7. *कॉटन के कपड़े*: गर्मी से बचने के लिए हमेशा कॉटन के हल्के कपड़े पहनें। 8. *तले हुए पदार्थों से बचें*: ज्यादा तेल वाले, तले हुए या भुने हुए पदार्थों का सेवन करने से बचें। 9. *पुदीना पानी*: पीने के पानी में पुदीना डालकर पीने से शरीर को ताजगी मिलती है। 10. *बेल का शरबत*: गर्मियों में बेल का शरबत पीना स्वास्थ्य के लिए और शरीर को ठंडा रखने के लिए बहुत फायदेमंद होता है [1][2][3]। क्या आप गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए और कोई टिप्स जानना चाहते हैं?

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Mar 27, 2026

Bhojan karne ke Sath sath Pani Pi ne ke liye bhi Jaruri Hota hai...isi liye...