
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
71 days ago
विजयदुर्ग किले की **'समुद्र के नीचे की दीवार'** (Underwater Wall) प्राचीन भारतीय समुद्री इंजीनियरिंग का एक अद्भुत और रहस्यमयी उदाहरण है। इसे अक्सर मराठा नौसेना की एक गुप्त और अत्यधिक प्रभावी रक्षा प्रणाली माना जाता है। इस दीवार के बारे में कुछ मुख्य और दिलचस्प तथ्य इस प्रकार हैं: ### 1. यह कैसे काम करती थी? यह दीवार समुद्र की सतह के ठीक नीचे बनाई गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन के बड़े जहाजों को गुमराह करना और उन्हें नष्ट करना था: * **गुप्त अवरोध:** समुद्र की सतह से दिखाई न देने के कारण, दुश्मन के जहाज यह नहीं समझ पाते थे कि पानी के नीचे कोई ठोस रुकावट है। * **टक्कर और विनाश:** जब दुश्मन के भारी जहाज बिना जानकारी के इस क्षेत्र में प्रवेश करते थे, तो वे नीचे छिपी हुई इस पत्थर की दीवार से टकराकर क्षतिग्रस्त हो जाते थे या फंस जाते थे। * **आसान लक्ष्य:** फंसे हुए या धीमे पड़े जहाजों को मराठा नौसैनिक आसानी से अपने तोपखाने या छोटे जहाजों के माध्यम से नष्ट कर देते थे। ### 2. इंजीनियरिंग का चमत्कार * **निर्माण सामग्री:** माना जाता है कि इस दीवार को बनाने के लिए विशाल पत्थरों को 'लेड' (सीसा) और लोहे की पट्टियों या विशेष प्रकार के मजबूत चूने (जैसे 'चुना-गुड़-रेती' मिश्रण) के साथ जोड़ा गया था, ताकि यह खारे पानी के दबाव और कटाव को लंबे समय तक झेल सके। * **सटीक गणना:** मराठा इंजीनियरों ने इस तरह से दीवार का निर्माण किया था कि केवल स्थानीय अनुभवी नाविक ही जानते थे कि ज्वार-भाटा (High and Low Tide) के समय जहाज को किस रास्ते से सुरक्षित निकालना है। ### 3. इसका इतिहास और शोध * **पुरातत्व विभाग की खोज:** भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी (NIO) ने कई बार इस क्षेत्र का सर्वेक्षण किया है। उन्होंने माना है कि यह संरचना इंसानों द्वारा निर्मित है, न कि प्राकृतिक चट्टान। * **कान्होजी आंग्रे की रणनीति:** इस तरह की रक्षा प्रणाली ने मराठा नौसेना को उस समय के शक्तिशाली यूरोपीय देशों (ब्रिटिश, डच, पुर्तगाली) के खिलाफ एक बहुत बड़ी बढ़त दी थी। ### 4. आज की स्थिति सदियों के समुद्री कटाव और ज्वार-भाटे के कारण, अब यह दीवार काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो चुकी है और पूरी तरह से पानी में डूबी हुई है। यह केवल कम ज्वार (Low Tide) के दौरान ही धुंधली दिखाई देती है। इसे देखना या इसका सटीक नक्शा बनाना आज भी बहुत चुनौतीपूर्ण है क्योंकि समुद्र का करंट यहाँ बहुत तेज रहता है। यह दीवार इस बात का प्रमाण है कि छत्रपति शिवाजी महाराज और कान्होजी आंग्रे के काल में मराठाओं की **'कोस्टल डिफेंस'** (तटीय सुरक्षा) तकनीक कितनी उन्नत और रणनीतिक थी।
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Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Jun 20, 2026
विजयदुर्ग किला, जिसे ऐतिहासिक रूप से **'घेरिया'** के नाम से भी जाना जाता है, महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के तट पर स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अभेद्य समुद्री किला है। मराठा नौसैनिक इतिहास में इस किले का स्थान अद्वितीय है। यहाँ विजयदुर्ग किले के इतिहास के मुख्य बिंदु दिए गए हैं: ### 1. उत्पत्ति और नामकरण * **निर्माण:** इस किले का निर्माण 12वीं शताब्दी (लगभग 1193-1205 ईस्वी) में **शिलाहार राजवंश** के राजा भोज द्वारा करवाया गया था। * **पुराना नाम:** अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण, जो तीन तरफ से पानी से घिरा हुआ है, इसे पहले 'घेरिया' कहा जाता था। * **नाम परिवर्तन:** 1653 में छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसे बीजापुर के आदिलशाही शासन से जीता और इसे **'विजयदुर्ग'** का नाम दिया, जिसका अर्थ है "विजय का किला"। ### 2. मराठा साम्राज्य में महत्व * **नौसैनिक मुख्यालय:** छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस किले की रणनीतिक क्षमता को पहचाना और इसका विस्तार किया। उन्होंने यहाँ मजबूत तटबंदी, बुरुज और अन्य संरचनाएं बनाईं। * **कान्होजी आंग्रे:** 18वीं शताब्दी में यह किला मराठा नौसेना के महान एडमिरल **कान्होजी आंग्रे** का मुख्य केंद्र बना। उन्हें "समुद्र का शिवाजी" भी कहा जाता है। उनके नेतृत्व में मराठा नौसेना ने यहाँ से अंग्रेजों, डचों और पुर्तगालियों को कड़ी टक्कर दी। * **अजेय किला:** यह किला अपनी तीन परतों वाली तटबंदी (Triple Line of Fortification) के लिए जाना जाता है, जिसके कारण इसे एक समय में 'अभेद्य' माना जाता था। ### 3. वास्तुकला और विशेषताएं * **संरचना:** यह किला लगभग 17 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें 27 बुर्ज हैं। * **गुप्त बोगदा:** यहाँ एक प्राचीन 200 मीटर लंबा गुप्त बोगदा (सुरंग) मौजूद है, जिसका उपयोग आपातकालीन स्थिति में सुरक्षित निकास के लिए किया जाता था। * **आधुनिक तकनीक:** इतिहासकार मानते हैं कि यहाँ पानी के नीचे एक 400 मीटर लंबी 'चिलखती तटबंदी' (समुद्र के भीतर दीवार) बनाई गई थी, जो दुश्मन के जहाजों को टक्कर मारकर उन्हें डुबोने में सक्षम थी। यह उस समय की उन्नत इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना है। ### 4. पतन और ब्रिटिश अधिकार * कई दशकों तक मराठा नौसेना का प्रभुत्व बनाए रखने के बाद, 1818 में मराठा साम्राज्य के पतन के साथ यह किला अंततः अंग्रेजों के अधीन हो गया। ### 5. पर्यटन की दृष्टि से आज यह किला महाराष्ट्र पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र है। यहाँ से अरब सागर का दृश्य बेहद विहंगम दिखता है। पर्यटक यहाँ पुरानी तोपें, किले की मजबूत दीवारें, और वाघोटन नदी के मुहाने का सुंदर दृश्य देखने आते हैं।
