
SHREE SHARMA
426 days ago
भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि श्री रघुवीर का यश भव (जन्म-मरण) रूपी रोग की (अचूक) दवा है। जो पुरुष और स्त्री इसे सुनेंगे, त्रिशिरा के शत्रु श्री राम जी उनके सब मनोरथों को सिद्ध करेंगे.. जय सियाराम 🙏

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