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यह कल्पना वाकई मजेदार है! अगर हमारे हिंदी सिनेमा के दिग्गज गायक किसी ढाबे पर बैठकर खाना ऑर्डर करें, तो उनकी बातचीत और अंदाज़ उनके सदाबहार गानों की झलक देंगे। यहाँ एक छोटी सी झलक है कि वह शाम कैसी होगी: 🎤 ढाबे पर दिग्गजों की महफिल 1. किशोर कुमार (मस्ती भरे अंदाज में) बैठते ही टेबल थपथपाकर वेटर को बुलाएंगे: > "ओ नन्हे से फरिश्ते! जरा इधर तो आ... बाबू भाई, थोड़ा 'चलता मुसाफिर' वाला पनीर टिक्का ले आओ और सुनो, मिर्च जरा 'नखरे वाली' कम रखना, वरना कल सुबह 'आने वाला पल' भारी पड़ जाएगा! हा-हा-हा!" > 2. मोहम्मद रफ़ी (शालीनता और मिठास से) बड़े प्यार से वेटर के कंधे पर हाथ रखकर कहेंगे: > "बरखुरदार, 'तुम जो मिल गए हो' तो भूख जाग उठी है। बस एक ऐसी दाल मखनी खिला दो जिसे खाकर रूह बोल उठे— 'क्या हुआ तेरा वादा?' और हाँ, मक्खन जरा 'परदा है परदा' की तरह ऊपर से डाल देना।" > 3. मुकेश जी (सादगी और जज्बात के साथ) थोड़ा रुककर, धीमी मुस्कान के साथ: > "भाई, 'दोस्त दोस्त ना रहा' अगर तुमने प्याज के लच्छे साथ में नहीं दिए। सादा खाना लाना, 'सजन रे झूठ मत बोलो', मसाला ज्यादा मत डालना। बस तंदूरी रोटी ले आओ, 'जीना यहाँ मरना यहाँ' इसके सिवा जाना कहाँ!" > 4. कुमार सानू (90s के रोमांटिक अंदाज में) आँखें बंद करके सुर छेड़ते हुए: > "वेटर... 'तुम्हें अपना बनाने की कसम' खाई है, पर अभी तो बस आलू का परांठा खिला दो। और ऊपर से दही देना, क्योंकि 'धीरे-धीरे से मेरी भूख को बढ़ाना' तुम्हारा काम है।" > 5. उदित नारायण (अपनी मशहूर मुस्कान के साथ) > "अरे भाई! 'पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा', पर बेटा तो यहाँ ढाबे पर भूखा बैठा है। जरा कड़क चाय और मिक्स वेज लाना, और 'ऐ मेरे हमसफर' वेटर भाई, जरा जल्दी लाना!" > एक साथ सबका कोरस: जब बिल आएगा, तो सब एक दूसरे की तरफ देखेंगे और गाएंगे— > "ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे... (पर बिल तू ही भरेगा!)" >

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