
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
337 days ago
नवरात्रि का छठा दिवस – माँ कात्यायनी की कृपा से भीतर के भय को त्यागें और आत्मबल को जागृत करें। गुरुदेव कहते हैं – “जो भीतर से निर्भय है, वही युग निर्माण का वाहक बनता है।” आज गायत्री मंत्र के जप से साहस और सेवा का संकल्प लें। आध्यात्मिक महत्व – आत्मबल और विजय का संकल्प 📜 मुख्य संदेश: माँ कात्यायनी वह शक्ति हैं जो राक्षसों का संहार करती हैं और साधक को भीतर से निर्भय बनाती हैं। गुरुदेव कहते हैं — "साहस और आत्मबल ही साधना के दो पंख हैं। जो भीतर से निर्भय है, वही युग निर्माण का वाहक बनता है।" आज का दिन है — 👉 भीतर के भय को त्यागने का 👉 साहस और तप से आत्मबल को जागृत करने का 👉 साधना को युग निर्माण से जोड़ने का 🌺 आज का चिंतन: "मैं माँ कात्यायनी की कृपा से निर्भय बनूँ, और आत्मबल से सेवा का मार्ग अपनाऊँ।" 🕯️ आज का अनुष्ठान: दीप प्रज्वलन – साहस का प्रतीक मौन ध्यान – 11 मिनट पुष्प अर्पण – तप और विजय के भाव से 🙏 शुभ प्रभत बंदन आपका दिन मंगल हो 🙏
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