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*क्या आपने कभी सोचा है— जिसे हम पत्थर की मूर्ति कहते हैं, वही भगवान समय को चला सकता है?* जयपुर की यह कथा आपकी सोच बदल देगी… 📖 प्रसिद्ध कथा – जयपुर के गोपीनाथ जी जयपुर नगरी में एक बार एक अंग्रेज़ अधिकारी आया। राजसी वैभव देखने के बाद वह सीधे पहुँचा श्री गोपीनाथ जी के मंदिर। उसने दर्शन किए और पंडित जी से पूछा— “यह कौन हैं?” पंडित जी बोले— “ये हमारे भगवान श्रीकृष्ण हैं।” अंग्रेज़ हँस पड़ा— “अगर ये भगवान हैं तो तुम इन्हें कपड़े क्यों पहनाते हो? भोग क्यों लगाते हो? पूजा क्यों करते हो? ये तो सिर्फ़ मूर्ति हैं— न बोलते हैं, न चलते हैं, न जीवित हैं।” पंडित जी शांत मुस्कुराए। उन्होंने कहा— “साहब, आप समय को बहुत मानते हैं न?” अंग्रेज़ बोला— “हाँ, समय से बढ़कर कुछ नहीं।” पंडित जी ने मंदिर में टंगी बिना चाबी , बिना नाप से चलने वाली घड़ी की ओर इशारा किया और कहा— “यह घड़ी रोज़ ठाकुर जी को वस्त्र पहनाने के समय अपने आप रुक जाती है। और जब सेवा पूरी होती है— तो अपने आप फिर चल पड़ती है।” अंग्रेज़ चौंक गया। उसने कई बार देखा— घड़ी सचमुच रुक रही थी। पंडित जी बोले— “जो समय को रोक दे, क्या वह निर्जीव हो सकता है? जो सेवा के समय प्रतीक्षा करे, क्या वह साक्षात भगवान नहीं?” अंग्रेज़ की आँखें झुक गईं। उसने कहा— “आज समझ आया… मूर्ति पत्थर की नहीं होती, हमारी दृष्टि पत्थर की होती है।” 🌺 भावार्थ 👉 भगवान को देखने के लिए आँखें नहीं, 👉 भाव चाहिए। 👉 जहाँ सेवा है, 👉 वहाँ कृष्ण जीवित हैं। 🙏 अगर आप मानते हैं कि ठाकुर जी आज भी लीला करते हैं, तो इस कथा को Share करें। *“जय श्री कृष्ण”*

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