
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
23 hours ago
श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार वह प्रतापी चक्रवर्ती सम्राट **महाराजा परीक्षित** ही थे, जिन्होंने कलियुग को सबसे पहले दंडित किया था। जब महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने महाप्रस्थान किया, तब अर्जुन के पौत्र और वीर अभिमन्यु-उत्तरा के पुत्र **महाराजा परीक्षित** को हस्तिनापुर का राजसिंहासन सौंपा गया। ### वह ऐतिहासिक प्रसंग जब कलियुग पकड़ा गया एक दिन जब राजा परीक्षित अपने साम्राज्य के दौरे पर निकले, तो उन्होंने सरस्वती नदी के तट पर एक हृदयविदारक दृश्य देखा: * एक काले रंग का, राजसी वस्त्र पहने क्रूर व्यक्ति हाथ में गदा लिए एक असहाय बैल को बेरहमी से पीट रहा था। * वह बैल तीन पैर टूटने के कारण केवल एक पैर पर खड़ा कांप रहा था, और पास ही एक गाय खड़ी रो रही थी। **प्रतीकात्मक अर्थ:** * **बैल:** धर्म का साक्षात स्वरूप था, जिसके तीन चरण—**सत्य, तप और शौच (पवित्रता)** पहले के तीन युगों में नष्ट हो चुके थे और केवल एक पैर—**'दया'** बचा था। * **गाय:** साक्षात पृथ्वी देवी थीं, जो कलियुग के अत्याचार और अधर्म के भय से अश्रु बहा रही थीं। * **क्रूर व्यक्ति:** स्वयं **कलियुग** था। ### जब गर्दन पर रख दी तलवार एक निरपराध जीव पर ऐसा अत्याचार देख महाराजा परीक्षित अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने तुरंत अपनी म्यान से चमचमाती तलवार निकाली और गर्जना करते हुए बोले: > *"रे दुष्ट! मेरे न्यायप्रिय राज्य में रहकर तू निरपराध जीवों को सताने का साहस कैसे कर रहा है? तू वध के योग्य है!"* > महाराजा ने कलियुग की गर्दन पर अपनी तलवार रख दी। परीक्षित का प्रचंड पराक्रम देखकर कलियुग कांप उठा। उसने अपने राजसी वस्त्र उतार फेंके और अपनी जान की भीख मांगते हुए राजा के चरणों में गिर पड़ा। शरणागत की रक्षा करना क्षत्रिय धर्म था, इसलिए राजा ने उसका वध तो नहीं किया, किंतु उसे अपने राज्य से तुरंत निष्कासित करने का आदेश दिया। ### कलियुग को मिले 4 + 1 स्थान जब कलियुग ने प्रार्थना की कि पूरी पृथ्वी पर आपका ही अखंड साम्राज्य है, तो मैं कहाँ रहूँ? तब राजा परीक्षित ने उसे 4 अधर्म के स्थान दिए: 1. **द्यूत (जुआ):** जहाँ जुआ और सट्टेबाजी होती है। 2. **पान (मद्यपान):** जहाँ शराब और नशीले पदार्थों का सेवन होता है। 3. **स्त्री-संग (व्यभिचार):** जहाँ वासना, अनैतिक संबंध और अनाचार होता है। 4. **हिंसा (पशु वध):** जहाँ निर्दोष जीवों की हत्या होती है। कलियुग के और स्थान मांगने पर राजा ने उसे पांचवां स्थान दिया: * **सुवर्ण (अन्याय से अर्जित स्वर्ण/धन):** जिसमें झूठ, मद, काम और वैर का वास होता है। यही वह क्षण था जब कलियुग ने धरती पर अपने पैर जमाए, और बाद में स्वर्ण मुकुट के माध्यम से ही राजा परीक्षित की बुद्धि को प्रभावित कर उनके श्राप और तक्षक दंश का निमित्त बना। *इस सीरीज़ के अगले भाग के लिए क्या आप राजा परीक्षित को मिले श्राप और श्रीमद्भागवत कथा के आरंभ की कड़ी जोड़ना चाहेंगे?*

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