
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
234 days ago
8.1.2026 जीवन में सफलता और असफलता तो प्रायः मिलती ही रहती है। अधिकतर ऐसा देखा जाता है, कि *"जब व्यक्ति को किसी कार्य में सफलता मिलती है, तो उससे उस व्यक्ति में अभिमान उत्पन्न होता है। और वह व्यक्ति उस अभिमान को अपने सिर में बिठा लेता है। उसका परिणाम यह होता है, कि उसकी बुद्धि नष्ट हो जाती है। जब किसी व्यक्ति की बुद्धि नष्ट हो जाती है, तो फिर उसके सारे काम बिगड़ जाते हैं।"* *"और जब कभी जीवन में असफलता मिलती है, तब उससे दुख होता है। जब व्यक्ति उस दुख को अपने हृदय में बिठा लेता है, तो तब भी उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। इन दोनों स्थितियों में व्यक्ति का जीवन दुखमय हो जाता है।"* यदि आप अपने जीवन को सुखमय बनाना चाहते हों, तो ऊपर बताई ये दो गलतियां न करें। *"जब सफलता मिले, तो उसका अधिकतम श्रेय ईश्वर को देवें। क्योंकि उसी की कृपा एवं सहायता से आपको सफलता मिली है।"* *"और जब असफलता मिले, तब भी इतना ही देखें, कि मुझसे कहां गलती हुई, जिसके कारण मुझे असफलता का मुख देखना पड़ा।" तब इतना संकल्प करें, कि "मैं अब भविष्य में ऐसी या अन्य कोई भी ग़लती नहीं करूंगा।"* *"कभी-कभी दूसरे लोगों की गलती या अन्याय आदि से भी आपको असफलता प्राप्त हो सकती है। यदि ऐसा हो, तो वहां भी संकल्प करें, कि इस बार तो यह लापरवाही हो गई, अगली बार पूरी सावधानी से काम करूंगा, जिससे मुझे असफलता प्राप्त न हो।"* *"यदि आप इतना संकल्प करके आगे का जीवन सावधानी से जीएंगे। तो आपका मानसिक एवं बौद्धिक संतुलन ठीक बना रहेगा, और आप उदास निराश नहीं होंगे। आपके भविष्य के निर्णय सही होंगे। और आप फिर से बुद्धिमत्ता पूर्वक पुरुषार्थ करते हुए अपने जीवन को सुखमय बना सकेंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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