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🪯न तो सुख मूल्यवान है और न दुःख। आपने इन दोनों पर कुछ ज़्यादा ही ध्यान दिया है। इसी लिए उलझ गए हैं। यह दोनों ध्यान देने योग्य नहीं हैं। इनके प्रति उपेक्षा के सिवाय किसी और भाव की आवश्यकता नहीं है सुख आए तो उसकी उपेक्षा करें, क्योंकि वह जाने वाला है। दुख आए तो उसकी उपेक्षा करें क्योंकि वह ज़्यादा देर टिकेगा नहीं। दोनो कभी सदा नहीं टिकते, तो फिर परेशान क्यों हैं ? रह लेने दें इन्हें कुछ समय ये बेरूपा ये बेरंगा रहता है अंग संग में। अपनी अपनी चुनरी साधो रंग लो इसके रंग में। इस दुनिया के रंग हैं जितने सब फीके पड़ जायेंगे। किसी काल रंगीन दिखेंगे किसी काल धुल जायेंगे। भक्ति का रंग पक्का साधो जो न उतरने वाला है। मन को निर्मल सुन्दर उज्ज्वल पावन करने वाला है। जिसको अपना मान है प्यारा भक्ति रंग न भायेगा। जो भी मैं का त्याग करेगा भक्ति में रंग जायेगा। बेरंगे के रंग में भीगो आनंद से भरपूर रहो। कहे ‘हरदेव’ कि नाम में डूबो और मस्ती में चूर रहो।

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Pannalal Chouhan

Pannalal Chouhan

Jan 3, 2026

राधे राधे