
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
19 hours ago
30.8.2026 *"ब्रह्मचर्य का अर्थ है, अपने वीर्य की रक्षा करना। वीर्य रक्षा के लिए अपने मन तथा सभी इंद्रियों पर संयम करना होगा। व्यभिचार आदि पाप कर्म नहीं करना। तब जाकर वीर्य की रक्षा होगी। इसको ब्रह्मचर्य कहते हैं। योगियों के लिए यह अनिवार्य है।"* *"ब्रह्मचर्य का पालन करने से, मन इंद्रियों पर संयम रखने से, ईश्वर उपासना ध्यान यज्ञ सेवा दान आदि शुभ कर्म करने से हमारी आयु बढ़ती है , मन में आनंद उत्साह निर्भयता प्रेम सेवा दया की भावना बढ़ती है , जीवन में आनंद शांति उत्साह बढ़ता है । हम स्वस्थ एवं प्रसन्न रहते हैं। प्रसन्न रहने से हम शुभ कर्म करते हैं। और इससे हमें धन समृद्धि प्रतिष्ठा सम्मान आदि सब गुणों की प्राप्ति होती है । इत्यादि लाभों को देखकर ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।"* इसके लिए गंदे मित्रों गंदी बातों गंदे उपन्यासों गंदी पुस्तकों गंदी फिल्मों आदि से दूर रहें। विपरीत लिंग वालों अर्थात पुरुष, अन्य स्त्रियों आदि से दूर रहें। तथा स्त्रियां, अन्य पुरुषों से दूर रहें। पति पत्नी सोने का बिस्तर भी अलग अलग रखें। *"ऊपर ऊपर से प्रेम भाव बनाए रखें। केवल संतान उत्पत्ति के लिए ही पति पत्नी संयोग करें। ऐसा ऋषियों का सिद्धांत है।"* (देखें - सत्यार्थ प्रकाश समुल्लास 4) *"प्रतिदिन व्यायाम करें। नियमित रूप से प्रतिदिन सुबह शाम कम से कम 20-20 मिनट ईश्वर की उपासना करें। प्रतिदिन यज्ञ करें । मन को शुद्ध बनाकर किसी न किसी कार्य में व्यस्त रहें । खाली न रहें। ईश्वर का दंड सदा याद रखें। अधिक भोगी विलासी बनने से बार-बार जन्म मरण के चक्र में बंधना पड़ेगा और सैकड़ों दुख भोगने पड़ेंगे , ऐसा विचार चिंतन प्रतिदिन बनाएं।" "भोग विलास में थोड़ी देर का सुख है और हानि बहुत अधिक है।"* ऐसा रोज बार-बार चिंतन करें। *"यदि मन में कुछ चंचलता आदि उत्पन्न होने लगे, तब तत्काल गायत्री मंत्र का पाठ आरंभ कर दें। गायत्री मंत्र का पाठ दिन में अधिक से अधिक करें। चलते फिरते खाते पीते व्यायाम करते समय भी गायत्री मंत्र का पाठ मन में चालू रखें।"* ईश्वर से विशेष प्रार्थना करें कि *"हे ईश्वर! मुझे शक्ति दीजिए, बुद्धि दीजिए, विद्या दीजिए, कि मैं कामवासना से बच सकूं। ब्रह्मचर्य का ठीक ठीक पालन कर सकूं।"* *"पुरुष लोग दूसरी स्त्रियों को माता बहन और बेटी की दृष्टि से देखें। जैसे आप अपनी माता बहन को देखते हैं, वैसी पवित्र भावना से स्त्रियों को देखें। उन के प्रति मन में भी कोई दुर्भावना न रखें।" "ऐसे ही स्त्रियां दूसरे पुरुषों को भाई पिता या पुत्र की दृष्टि से देखें, तो उनका मन पवित्र रहेगा, तथा ब्रह्मचर्य का पालन भी ठीक-ठीक हो पाएगा।"* दिन में जब भी समय मिले, मन में बार-बार ऐसा संकल्प करें। *"मैं स्त्रियों के साथ किसी भी प्रकार का कोई भी दुर्व्यवहार नहीं करूंगा। यदि मैं स्त्रियों के साथ कोई दुर्व्यवहार करूंगा, तो ईश्वर मुझे कुत्ता गधा सांप बिच्छू हाथी घोड़ा वृक्ष वनस्पति आदि योनियों में भयंकर दुख देगा। मैं यह दुख भोगना नहीं चाहता। इसलिए मैं ऐसा कोई गलत काम नहीं करूंगा।"* *"ऐसा बार-बार सोचने और ईश्वर के दंड को याद रखने से आपका मन पवित्र बना रहेगा और आप कामवासना आदि दोषों से बचे रहेंगे।"* *"इस लेख को प्रतिदिन दो बार अर्थात सुबह शाम 100 दिन तक अवश्य पढ़ें। आपको बहुत अधिक लाभ होगा।"* --- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़ गुजरात।"*

Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
