
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
1 day ago
शुभ दोपहर! बहुत ही गहरी और सटीक बात लिखी है इंसान भविष्य को संवारने की दौड़ में इतना उलझ जाता है कि वर्तमान को जीना ही भूल जाता है। सुख की तैयारी करते-करते वक्त कब हाथ से फिसल जाता है, इसका एहसास अक्सर बहुत देर से होता है। इस विचार के साथ एक छोटा सा पूरक भाव: > **"कल की फिक्र में आज को न गंवाइए, > खुशियाँ दरवाजे पर दस्तक देने का इंतजार नहीं करतीं, > जो लम्हा पास है, उसे ही मुस्कुरा कर अपना बनाइए।"** >

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Sep 27, 2026
Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🌹 Shubha Dopahar Ji 🙏🌹

Sanju 🌺
Sep 27, 2026
bahut hi sundar 👌 Radhe Radhe 🙏
