
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
126 days ago
26.4.2026 निन्दा चुगली करना, यह दोष तो सदा से चला आ रहा है। कुछ लोग निंदा चुगली में बहुत मजा लेते हैं। उन्हें दूसरों पर सच्ची झूठी टीका टिप्पणी करने में बहुत आनंद आता है। *"ऐसे लोग कभी-कभी सच बात भी कहते हैं, परंतु अधिकतर झूठे आरोप लगाकर लोगों को बदनाम करते हैं। भले ही उन्हें इस कार्य में सुख मिलता हो, परंतु वे इसका दुष्परिणाम नहीं जानते, कि इससे समाज की बहुत बड़ी-बड़ी हानियां होती हैं। और ऐसे निंदा चुगली करने वाले लोगों को ईश्वर की ओर से बहुत भारी दंड भी भोगना पड़ता है।"* समाज में कुछ बुद्धिमान लोग भी होते हैं। जो इस बात को समझते हैं, कि *"यदि कोई किसी पर झूठे आरोप लगाए, तो वह अच्छा नहीं है।" "ऐसी स्थिति में वे उन झूठी बातों का खंडन करते हैं, और समाज में भ्रांति फैलाने वाले लोगों को रोकते हैं।"* जिस पर ये झूठे आरोप लगाए जाते हैं, यदि कोई व्यक्ति उस समय उन बातों को अच्छी तरह से जानता हो, कि *"उस व्यक्ति को व्यर्थ ही बदनाम किया जा रहा है। उस पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। तब वह झूठे आरोपों का खंडन करके उस व्यक्ति की रक्षा करता है। इतना ही नहीं बल्कि उसके उत्तम गुणों को समाज में स्थापित करता है।"* और बताता है, कि *"वह तो बहुत अच्छा व्यक्ति है, उसे व्यर्थ बदनाम नहीं करना चाहिए। अन्यथा समाज के लोग उसके उत्तम गुणों से लाभ नहीं उठा पाएंगे। इससे समाज की बड़ी हानि होगी।"* *"इस तरह से यदि कोई सत्य बात कह कर उस निर्दोष व्यक्ति की रक्षा करता है, तो यह उस व्यक्ति के लिए बहुत बड़ा सम्मान है," कि "जो उसकी अनुपस्थिति में उस पर लगाए गए मिथ्या आरोपों का खंडन करके समाज में उसके गुणों को स्थापित किया गया।"* आप भी यदि कहीं ऐसा होते हुए देखें, तो *"अवश्य ही उन निंदक एवं चुगलखोरों का विरोध करें, तथा समाज में भ्रांति फैलने से रोकें। आपको इसका बहुत बड़ा पुण्य मिलेगा, और तत्काल आनन्द भी मिलेगा।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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