
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
4 days ago
23.10.2026 जीवन में कुछ निर्णय सामान्य होते हैं, उन्हें व्यक्ति स्वयं भी ले सकता है। जैसा कि प्रतिदिन की दिनचर्या में बहुत से निर्णय लेने होते हैं। उसमें तो इतनी समस्या नहीं है। लेकिन जब जीवन का कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना हो, और उसे क्षेत्र में आपका कोई विशेष अनुभव भी न हो तो, जैसे कि *"मुझे भविष्य में आगे क्या करना है? किसके साथ कैसा व्यवहार करना उचित रहेगा इत्यादि।"* तो उस विषय में जब व्यक्ति अकेला अपनी बुद्धि से निर्णय लेता है, तो उसमें बहुत बार गलतियां हो जाती हैं। बाद में जब उसकी हानि उठानी पड़ती है, तब समझ में आता है, कि *"मैंने वह निर्णय गलत लिया।" "जैसे संसद में इतने सारे लोग मिलकर निर्णय लेते हैं, तब भी गलतियां हो जाती हैं। फिर समय-समय पर उन कानूनों में संशोधन किए जाते हैं, जो गलत बन गए थे।"* इससे पता चलता है कि *"यदि आप अकेले निर्णय लेंगे, तो उसमें भी गलती होने की बहुत संभावना है।"* तो ऐसी गलतियों से बचने के लिए अच्छा है, कि *"दूसरे बुद्धिमान लोगों से सलाह लेकर कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाए।"* जिसको भी आप अपने से अधिक बुद्धिमान और विश्वास के योग्य मानते हों, कि *"यह व्यक्ति मुझे धोखा नहीं देगा, गलत सलाह नहीं देगा, ठीक ही सलाह देगा।"* इस प्रकार के किसी भी कम से कम एक व्यक्ति की सलाह अवश्य लें। और यदि एक से अधिक लोग हों, तो भी अच्छा है। *"सलाह अनेक लोगों की सुनें, परन्तु अंतिम निर्णय स्वयं अपनी बुद्धि से लेवें।"* क्योंकि यदि आपको भविष्य में कोई हानि हो भी गई, *"तब आप सलाह देने वाले व्यक्ति के सिर पर सारा दोष डालेंगे। ऐसा करना उचित नहीं है।क्योंकि उसकी सलाह ठीक होने पर भी जब आपने उस पर आचरण किया, उस समय भी आपसे कुछ गलतियां हो सकती हैं। तब उनका सारा दोष आप दूसरे व्यक्ति पर डालें, तो यह न्याय नहीं है।"* *"इसलिए अंतिम निर्णय तो स्वयं ही लेवें। उसकी सारी जिम्मेदारी आपके ऊपर ही रहेगी। यदि आप इस प्रकार से जीवन जिएंगे, तो जीवन में आपकी गलतियां कम होंगी, और आप अधिक से अधिक सुखी रहेंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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